कोरबा। जिला पंचायत कोरबा का एक अजब-गज़ब कारनामा सामने आया है। जिला पंचायत में शिकायत समन्वयक का पद पिछले पांच बरसों से खाली पड़ा हुआ है। अब जब पद ही खाली है तो अतिरिक्त प्रभार से काम चलाया जा रहा है। हद तो तब हो रही है जब खुद की  शिकायत की जांच खुद प्रभारी समन्वयक कर रहे है।

जिला पंचायत कोरबा में पिछले पांच वर्षों से जिला शिकायत समन्वयक का पद खाली चल रहा है। रिक्त पद को भरने के लिए उच्च अधिकारी गंभीर नही है और इसी बात का नाजायज़ फायदा प्रभारी उठा रहें हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिकायत शाखा का जो कार्य देखता था उसमे जबरदस्त ऊपरी कमाई है। जिसके खिलाफ भी कोई शिकायत मिलती है उसको बुलाकर ऊपर से नीचे तक सबको मैनेज के नाम पर मोटी रकम की वसूली कर सारे मामलों में लीपापोती की जा रही है।यही नही पूर्व में मनरेगा के परियोजना अधिकारी के खिलाफ शिकायतों की लंबी सूची थी, पर  वो खुद जांच अधिकारी थे तो स्वाभाविक है लोगो की शिकायतों को दरकिनार कर सबको कूड़ेदान में डाल दिया गया। हालांकि अब शिकायत समन्वयक का कार्य मनरेगा में पदस्थ पीआरओ को सौंपा गया है, लेकिन नाम का। क्योकि अभी भी फाइनल जांच एपीओ जी करते है। इससे जाहिर है शिकायत की जांच किस तरह होगी और शिकायतकर्ताओं की शिकायत से भरी पीड़ा का क्या होता होगा..? इसका अंदाजा बख़ूबी लगाया जा सकता है।