यू पी,ऐसा क्या हुआ कि हाथरस कांड पर अपनी जिद पर अड़ी यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अचानक बैकफुट पर आ गई और न केवल मीडिया को हाथरस कांड में पीड़ित पक्ष के गांव जाने की इजाज़त दे दी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को वहां जाने की भी अनुमति दे दी और बिना पीड़ित पक्ष की मांग के इस प्रकरण की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। यही नहीं इसके पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो आला अफ़सरों, अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी और पुलिस महानिदेशक डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने शनिवार को पीड़िता के परिजनों से मुलाक़ात भी की। यह योगी सरकार का हृदय परिवर्तन नहीं है बल्कि और डैमेज रोकने की कवायद है।
यह डैमेज कंट्रोल इसलिए ज़रूरी हो गया है कि यूपी सरकार की काफी फ़जीहत हुई है। पुलिस और प्रशासन ने हाथरस में पीड़िता के परिजनों को दो दिनों तक घेरेबंदी में रखा, उनसे मिलने भी किसी को नहीं जाने दिया। उनकी निगरानी रखी, उसके गांव की चौतरफा घेरेबंदी कर दी, ताकि गांव से कोई बाहर न जा सके न आ सके, लकिन हाथरस मामले में पुलिस ने मीडिया को पीड़ित परिवार से मिलने की इजाज़त दे दी।
पिछले दो-तीन दिन से हाथरस प्रशासन मीडिया और विपक्ष को पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दे रहा था। उत्तर प्रदेश सरकार ने राहुल और प्रियंका गांधी समेत पांच लोगों को हाथरस जाने की भी इजाजत दे दी। प्रशासन ने नेताओं के हाथरस जाने और पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इनमें मास्क लगाना और कोरोना से जुड़े अन्य प्रोटोकॉल का पालन करना शामिल है।
दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने भी हाथरस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था, जिलाधिकारी हाथरस और पुलिस अधीक्षक हाथरस को 12 अक्टूबर को तलब कर लिया है। न्यायालय ने इन अधिकारियों को मामले से संबंधित दस्तावेज इत्यादि लेकर उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही विवेचना की प्रगति भी बताने को कहा है। यह आदेश जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने दिया। खंडपीठ ने मृतक पीड़िता के मां-पिता और भाई को भी 12 अक्टूबर को आने को कहा है ताकि यह अदालत श्मशान के समय हुई घटना के तथ्यों और उनके संस्करण का पता लगा सके।
हाई कोर्ट ने कहा कि यह राज्य के आला अधिकारियों द्वारा मनमानी करते हुए मानवीय और मौलिक अधिकारों के घोर हनन का मामला है। खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले का परीक्षण करेगा कि क्या मृत पीड़िता और उसके परिवार के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है और क्या अधिकारियों ने मनमानी करते हुए उक्त अधिकारों का हनन किया है। यदि यह सही है तो न सिर्फ जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी बल्कि भविष्य के लिए दिशा-निर्देश के लिए कठोर कार्रवाई की जाएगी। खंडपीठ ने यह भी कहा कि हम यह भी देखेंगे कि क्या पीड़िता के परिवार की गरीबी और सामाजिक स्थिति का फायदा उठाते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों ने उन्हें संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया। खंडपीठ ने कहा कि यह कोर्ट पीड़िता के साथ हुए अपराध की विवेचना की भी निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र एजेंसी से जांच का आदेश भी दे सकता है।
हाई कोर्ट के आदेश के पहले सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश करके अपनी और छीछालेदर बचाने की कोशिश की है। यह योगी सरकार का हृदय परिवर्तन नहीं है बल्कि और डैमेज रोकने की कवायद है। इस कांड से सरकार पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
हाथरस कांड की जांच सीबीआई करेगी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के दफ्तर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। सीएम ऑफिस की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस केस की जांच सीबीआई से कराए जाने के आदेश दिए हैं। योगी सरकार के इस आदेश के बाद गैंगरेप पीड़िता की भाभी ने कहा कि हम सीबीआई जांच नहीं चाहते हैं। केस की न्यायिक जांच होनी चाहिए। हम जज की निगरानी में जांच चाहते हैं। उन्होंने कहा हि हमारी दीदी को न्याय मिलना चाहिए। परिवार का कहना है कि हमने सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी। पीड़िता के भाई ने कहा कि हमारे सवालों के जवाब नहीं मिले हैं, जितनी चाहे उतनी जांच होती रहे। हमें डीएम से शिकायत है। हम खुश तब ही होंगे जब हमारे सवालों के जवाब मिलेंगे। हमारी बहन का अंतिम संस्कार ऐसे क्यों किया गया।