IPS संजय भाटिया दिल्ली में कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने बताया था कि वह ग्रेजुएशन में एक सब्जेक्ट में फेल तक हो गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
UPSC के एग्जाम में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं, लेकिन कामयाबी चुनिंदा को ही मिल पाती है। कई बार मिली असफलता से कैंडिडेट्स निराश हो जाते हैं। आज हम आपको IPS संजय भाटिया की कहानी बताएंगे। संजय भाटिया की गिनती दबंग अधिकारियों में होती है, लेकिन कभी उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। आर्थिक तंगी भी ऐसी कि कभी खाना भी पूरा नहीं मिल पाता है।
संजय भाटिया ने इसका जिक्र खुद एक इंटरव्यू में किया था, मेरे तीन भाई और थे। पैरेंट्स के पास साधन सीमित थे। कई बार तो ऐसी भी स्थिति आई कि नाश्ता मिलता ही नहीं था क्योंकि खाना हुआ ही नहीं करता था। किसी ने बताया कि NDMC के स्कूल में बच्चों को नाश्ता दिया जाता है और कितना भी खाना खा सकते हो। मैंने पांचवी क्लास में ही इस स्कूल के एग्जाम की जिद की। मेरे पिता मुझे इस स्कूल के एग्जाम के लिए ले गए, लेकिन दुर्भाग्यवश मैं ये एग्जाम क्लियर नहीं कर पाया।

IPS संजय भाटिया याद करते हैं, मैं इसके बाद काफी हताश हो गया। मैंने साधारण सरकारी स्कूल में अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी। बाद में आठवीं क्लास के दौरान मेरा दोस्त घर पर आया। उसने मेरे घर का फर्नीचर देखा जो काफी टूटा हुआ था। मुझे ये देखकर बहुत अजीब लगा और मैं उसके घर से जाने के बाद काफी रोया भी। परिवार ने मुझे हिम्मत दी और ग्रेजुएशन के लिए मैंने IIT का एग्जाम दिया, लेकिन चयन नहीं पाया। इसके बाद मैंने दिल्ली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया।
कॉलेज के दिन: संजय भाटिया याद करते हैं, मैं अपने कॉलेज के दिनों में थोड़ा लापरवाह भी हो गया था। यही वजह थी कि मैं एक सब्जेक्ट में फेल भी हो गया था। उससे मुझे धक्का लगा था और मैंने अपनी तैयारी अलग तरीके से करनी शुरू कर दी थी।

ग्रेजुएशन के बाद मैं मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चला गया, लेकिन पीछे मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। मैं वापस लौटकर आया तो मां ने जाने नहीं दिया। इसके बाद मैंने UPSC करने का फैसला किया। पहले प्रयास में भी यूपीएससी क्लियर हो गया था, लेकिन मनमुताबिक सर्विस नहीं मिली। दूसरे प्रयास में मुझे IPS मिल गया और मैं कामयाब हो गया।