उद्धव, आदित्य और सुप्रिया सुले के खिलाफ आरोप निकले सही तो हो सकती है 6 महीने की जेल

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महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दरअसल तीनों पर चुनावी हलफनामे में संपत्ति और देनदारी की गलत या अधूरी जानकारी देने का आरोप है। चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ शिकायतों की जांच CBDT को सौंपी है।
महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ दल शिवसेना और उसकी सहयोगी पार्टी एनसीपी के इन नेताओं के चुनावी हलफनामे में काफी असंगतियों के आरोप हैं। अपनी संपत्ति और देनदारी की गलत या अधूरी जान जानकारी देने के चलते तीनों नेताओं को जांच का सामना करना पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार कि सुले, उद्धव और आदित्य ठाकरे के अलावा गुजरात के विधायक नाथाभाई ए पटेल के खिलाफ शिकायतों को चुनावी पैनल की प्रशासनिक समीक्षा पर आधारित जांच के लिए भेजा गया है। उद्धव और आदित्य ठाकरे का हलफनामा दाखिल करने वाले शिवसेना नेता ने इसे रूटीन का काम बताया।
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि शिकायतकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में कुछ सामग्री का हवाला दिया है जिससे पता चलता है कि इन नेताओं के हलफनामे में लिखी गई डीटेल सही नहीं है। माना जा रहा है कि इसी वजह से चुनाव आयोग ने मामले को सीबीडीटी को भेजा है।
चुनाव आयोग को कार्रवाई के लिए सीबीडीटी से अपडेट का इंतजार है। अगर नेताओं पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो रिप्रजेटेंशन ऑफ पीपल ऐक्ट की धारा 125 ए के तहत सीबीडीटी केस दर्ज किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत अधिकतम 6 महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों हो चुका है।
चुनावी हलफनामे में एक उम्मीदवार अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारी और शैक्षिक योग्यता का ब्योरा देता है। 2013 में चुनाव आयोग ने फैसला किया था कि हलफनामे में लिखी उम्मीदवारों की संपत्ति और देनदारी को सीबीडीटी वेरिफाइ करेगा।