बिलासपुर .मरवाही उपचुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने निर्देश जारी कर दोटूक कहा कि पीसीसी की ओर से जिनको जवाबदारी सौंपी जाएगी वे ही चुनाव क्षेत्र में रहेंगे। बगैर जिम्मेदारी वाले कांग्रेसजनों के चुनाव क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। संगठन को अभी से ही भीतरघात की आशंका सताने लगी है।

पूर्व मुख्यमंत्री व मरवाही के विधायक स्व अजीत जोगी के निधन के पखवाड़ेभर बाद से ही राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने लगी थी। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण साव सबसे पहले मरवाही पहुंचे। कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बहाने मरवाही की जनता और मैदानी कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने का काम किया था। सांसद के मरवाही से वापस लौटने के तीसरे दिन से सत्ताधारी दल की सक्रियता बढ़नी शुरू हुई जो वर्तमान में भी जारी है। राज्य सरकार ने राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रभारी मंत्री नियुक्त करने के साथ ही राजनीतिक रूप से संदेश दिया कि उपचुनाव में सांसद ज्योत्सना महंत व विधानसभाध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत की राजनीतिक दखलंदाजी बनी रहेगी। उनके सुझाव और रणनीति पर अमल होगा। राजस्व मंत्री व नए जिले के प्रभारी मंत्री की गिनती डॉ.महंत के करीबी के रूप में होती है। चुनावी रणनीति को और दुरुस्त करते हुए बीते दिनों बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शैलेष पांडेय,पाली तानाखार के विधायक मोहित केरकेट्टा,पीसीसी के महामंत्री अर्जुन तिवारी व उत्तम वासुदेव को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेंदारी सौंपी गई है। चारों प्रभारियों को संगठन प्रभारी व पीसीसी के उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव के साथ सामंजस्य बनाकर काम करना है और जरूरी रणनीति बनानी है। कांग्रेसी रणनीतिकार मरवाही सीट को जीतने के लिए फूंक-फंूक कर कदम रख रहे हैं। अब जबकि चुनाव की घोषणा हो गई है सत्ताधारी दल की सक्रियता भी उसी अंदाज में बढ़ने लगी है। मंगलवार को पीसीसी के अध्यक्ष मरकाम द्वारा जारी निर्देश को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।