The duniyadari news.कभी आदिवासियों का आहार कहे जाने वाले कोदो-कुटकी की अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ सकती है। मधुमेह रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद बताया जाने वाला यह मोटा अनाज स्वादिष्ट और पोषक भी होता है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसकी मार्केटिंग स्वसहायता समूहों के माध्यम से करवाने की योजना बनाई है। इससे जंगल से लगे गांवों के आदिवासियों को वनोपज और पर्यटन आधारित रोजगार उपलब्‍ध हो सकेगा।
यह प्रस्ताव राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। दरअसल, कई गुणों वाले कोदो-कुटकी की इस इलाके में अच्छी पैदावार होती है। इसे बड़ा बाजार मिल जाए तो आदिवासियों को अच्छा लाभ हो सकता है। बाजार में कोदो-कुटकी 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। प्रस्ताव के अनुसार कोदो-कुटकी की खेती करने वाले आदिवासियों का पंजीयन स्वसहायता समूह में कराया जाएगा।
इसी समूह के माध्यम से बांधवगढ़ के होटलों, जिले के व्यापारियों तक इसे पहुंचाया जाएगा। इस तरह आदिवासियों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सकेगा। मनुष्य-वन्य प्राणी संघर्ष भी रुकेगा जंगल पर आदिवासियों की निर्भरता कम हो और इसी वजह से होने वाले मनुष्य-वन्य प्राणी संघर्ष पर विराम लगे, इसमें भी यह योजना सहायक होगी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर विंसेंट रहीम ने बताया कि इसमें जिला पंचायत की सहायता भी ली जाएगी।