गाजियाबाद। कॉरोनाकाल में कम्पनी बहाना बनाकर लोगो से रोजगार छीन रही है। कुछ दिन पहले एक आईटी कम्पनी में काम करने को बुखार हो गया था, जिसका पता चलने पर कंपनी प्रबंधन ने उन्हें कोरोना टेस्ट करवाने और रिपोर्ट जमा करने को कहा। उन्होंने जिला एमएमजी अस्पताल में टेस्ट करवाया लेकिन रिपोर्ट 8 दिन बाद मिली। इस बीच लगातार तीन दिन ऑफिस नहीं आने पर कंपनी ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। उन्होंने मैनेजमेंट से बात की और रिपोर्ट मिलने में देरी की जानकारी दी, लेकिन अधिकारी ने इसे स्वीकार नहीं किया।
8 दिन बात रिपोर्ट मिलने पर उसमें सैंपल डेट और रिपोर्ट डेट दोनों लिखवाकर उन्होंने फाइल कंपनी में जमा कराई और अधिकारियों से काफी प्रार्थना की तो उनकी नौकरी बच गई। पर उनका कहना है कि वह कंपनी प्रबंधन की आंखों में खटकने लगे हैं। यह समस्या सिर्फ एक ब्यक्ति की नहीं है, बल्कि काम करने वाले हजारों लोगों की है जिन्हें किसी तरह के लक्षण दिखने पर कंपनी कोरोना टेस्ट के लिए कह रही है।
कंपनी दे रही काम में लापरवाही का नोटिस
गाजियाबाद से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली और गौतमबुद्ध स्थित निजी कंपनियों और अन्य संस्थानों में नौकरी करते हैं। निजी कंपनियों और संस्थानों ने उनके किसी भी कर्मचारी में कोरोना का कोई लक्षण दिखने पर टेस्ट करवाने के निर्देश दे रखे हैं। कर्मचारी को खांसी, जुकाम, बुखार होने पर कंपनी में कोरोना टेस्ट रिपोर्ट जमा करवानी होती है। बिना निगेटिव रिपोर्ट के कंपनी उन्हें ऑफिस में प्रवेश नहीं करने देती। जिले में रहने वाले अधिकांश लोग इस तरह का कोई लक्षण होने पर सरकारी लैब पर टेस्ट करवाते हैं।
‘लॉकडाउन की वजह से कंपनी ढूंढ रही बहाना’
कुछ ऐसे ही कर्मचारियों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद निजी सेक्टर की कंपनियों की हालत खराब है और वह किसी तरह से अपना स्टाफ कम करना चाहती हैं। ऐसे में गाजियाबाद में सरकारी स्तर पर कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी उनके लिए एक हथियार बन गया है और कर्मचारियों की नौकरी पर संकट बन रहा है।