कोरबा। कृष्णा हॉस्पिटल में उपचाराधीन एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। लेकिन परिजनों द्वारा प्राइवेट अस्पताल का भारी भरकंप बिल नहीं दे पाने पर अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को मृतक का शव देने से इनकार कर दिया। काफी हंगामा के बाद मृतक का शव परिजनों को सौपा गया।
कोरोना पॉजिटिव मरीज राहुल आदित्य की उपचार के दौरान कोरबा के कृष्णा हॉस्पिटल में मौत हो गई । उपचार पर हुए खर्च को अदा करने के नाम पर उसका शव परिजनों को नहीं दिया गया । यह जानकारी आसपास में फैलने के साथ मृतक के परिजन और परिचित यहां इकट्ठे हो गए उनके द्वारा इस रवैया पर घोर आपत्ति दर्ज की गई । लोगों का आरोप है कि मरीज को 1 लाख 60 हजार के पैकेज मैं यहां भर्ती किया गया था। यह राशि पहले ही अदा कर दी गई । तय समय सीमा में मरीज ठीक नहीं हो सका उसकी मौत हो गई । इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन परिजनों से 1 लाख 42 हजार की मांग कर रहा है। उसके शव को इसी नाम से बंधक बनाया गया है । मृतक राहुल के मित्र रिजाउल अंसारी ने बताया कि सर्दी खांसी बुखार होने पर राहुल को कोविड.19 हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था । वहां ठीक तरह से उपचार नहीं मिलने पर राहुल ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी थी । इसके बाद उसे कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था । बातचीत के आधार पर अस्पताल प्रबंधन को 1लाख 60 हजार की राशि पहले अदा कर दिया गया था।
अंसारी ने बताया कि पिछली रात राहुल की मौत हो गई इसकी सूचना मिलने पर परिजन और हम लोग यहां पहुंचे । हमने राहुल के शव की मांग की जिस पर अस्पताल प्रबंधन शेष राशि अदा करने के लिए दबाव बनाता रहा और शव नहीं दिया। जो रकम मांगी जा रही है परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है ही नहीं कि वह इतनी राशि और दे सके। राहुल के पिता जीवन लाल आदित्य को बीमारी के बारे में खबर पहले लग चुकी थी । तब उन्होंने अपने दूसरे पुत्रों को मार्गदर्शन देने के साथ उपचार दिलाने के लिए कहां था । उन्होंने बताया कि राशि के इंतजाम के लिए जमीन तक बेचने की योजना बना ली गई थी।
कोरोना की वजह से कृष्णा हॉस्पिटल में उपचार कराने के दौरान काल के गाल में समा चुके राहुल का शव परिजनों को सौंपने के मामले में काफी ड्रामा हुआ । परिजनों के हंगामे और मीडिया की उपस्थिति के बाद हालात नियंत्रित हुए ।