चिमनी हादसे के मृत मजदूरों के परिजनों को अब न्याय का इंतजार नही,सरकारी दफ्तरों में दबकर रह गई रिपोर्ट की फाइलें

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चिमनी हादसे के मृत मजदूरों के परिजनों को अब न्याय का इंतजार नही,सरकारी दफ्तरों में दबकर रह गई रिपोर्ट की फाइलें
0श्रमिक संगठन के श्रधांजलि तक सिमटी यादे
कोरबा। बालको चिमनी हादसे को गुजरे 11 साल हो चुके है। मृतक मजदूरों के चेहरे भले ही लोगो की यादों से धुंधली हो चुकी है, लेकिन न्याय की गुहार लगाने वाले परिजनों के आसअब भी बरकरार है । विडंबना यह भी है कि ग्यारह बरस बाद भी उन्हें न्याय नही मिल सकी है।
श्रमिक संगठन की ओर से न्याय की गुहार लगाने वाले परिजनों का साथ तो दिया जा रहा है लेकिन सरकारी तंत्र में पूंजीवाद हावी होने के कारण गुहार भरे आवेदन फाइलों में दफन हो कर रह गए है।कितनो ने तो अब न्याय की आस लगाना भी छोड़ दिया है वे बच्चे जिन्होंने अपने मजदूर और मजबूर पिता को खो कर यतीम की जिंदगी जी रहे है।उनके लिए सरकारी न्याय सपना बनकर रह गया है।ग्यारह साल के दौरान सरकारे बदलती रही लेकिन मजदूरों के साथ न्याय केवल भाषण और आश्वाशन तक ही सीमित रही ।बरसी की यह औपचारिकता न जाने कब तक जारी रहेगी अथवा मजदूरों को न्याय मिलेगी यह समय के गर्त में है।