The duniyadari news।भारत के साथ सीमा विवाद के बाद चीन से व्यापार प्रभावित हुआ है। इससे संकट में आए छत्तीसगढ़ के चरोटा संग्राहकों और स्टाकिस्टों के लिए राहत भरी खबर है। चरोटा को अब थाईलैंड के रूप में नया ग्राहक मिल गया है। प्रारंभिक मांग 70 टन की बताई जा रही है। चरोटा बीज से उत्पाद तैयार करने के लिए देश में एक भी प्लांट नहीं है। चीन, ताइवान और थाईलैंड में चरोटा बीज का उपयोग चाकलेट, दवा और काफी बनाने में किया जाता है। बचे हुए अवशेष का उपयोग गोंद बनाने में होता है।

छत्तीसगढ़ के चरोटा संग्राहकों और प्रोसेसिंग मिल संचालकों को नया विदेशी बाजार मिल गया है। थाईलैंड से चरोटा का आर्डर मिल गया है। सौदे के बाद गुजरात के मुद्रा बंदरगाह को कंटेनर के लिए तय किया जा चुका है। प्रारंभिक मांग तकरीबन 70 टन की बताई जा रही है। मालूम हो कि 90 के दशक से भारतीय चरोटा का सबसे बड़ा आयातक चीन रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए ही छत्तीसगढ़, गुजरात और ओडिशा में प्रोसेसिंग मिल की स्थापना की गई थी।