कोरबा।आवश्यक सेवा की श्रेणी में बैंकिंग सेक्टर को रखा गया है। इस वजह से लॉकडाउन में कोरबा में बैंकों को छूट की अनुमति कई शर्तों के साथ दी गई है। लॉक डाउन के बीच बैंको को खोलने की अनुमति दिया गया ,पर बैंक में किसी भी तरह की कोई भी ट्रांजेक्शन न करने की हिदायत दी गई है। अब जब पब्लिक से जुड़े सारे काम ही नही होंगे तो फिर बैंकिंग क्षेत्र को खोलने की छूट देने के औचित्य पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है?जिले में 12 अप्रेल की दोपहर 3 बजे से पूर्ण लॉक डाउन घोषित किया गया है। इस दौरान सभी तरह की दुकानों के साथ-साथ बैंकिंग सेक्टर को भी प्रतिबंधित  किया गया है। बीमारी के समय ही नकद धन राशि का उपयोग सबसे अधिक होता है क्योंकि बिना नकदी के हॉस्पिटल नीजि हो या सरकारी मरीज को बेड देना तो दूर देखने के लिए भी  डॉक्टर  तैयार नही होते। इस अब्यवहारिक निर्णय से पता नही कितने लोगों को दो चार होना पड़ता है। प्रदेश के मुखिया के निर्णय के बाद कोरबा जिले में भी लॉक डाउन में थोड़ी रियायत दी  गई है। जिसमें बैंक को खोलने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से कैश की जरूरत वाले लोगो ने राहत की सांस तो ली ,पर उनकी आशाओं पर तुषारापात हो गया क्योकि  बैंक तो खुला लेकिन पब्लिक से जुड़ी सारी सुविधाएं अभी भी बंद है। शहर के किसी भी बैंक से न तो आरटीजीएस हो रहा है और न नही कैश निकल रहा है। इससे अब पब्लिक फिर प्रशासन के निर्णय पर चटखारा लेते हुए कह रहै कि जब पब्लिक का बैंक में काम होना ही नही तो फिर खोलने का क्या मतलब?