कोरबा। जिले में कप्तान के रूप मे कार्यभार संभालने वाले खाकी की छवि सुधारने नित नए प्रयास कर रहे हैं। जिसमे अहम कड़ी सामुदायिक पुलिसिंग , जनता दरबार के बाद पुलिसवालो को सूर्यवंशी फ़िल्म दिखाकर कर्तब्य परायणता और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया जा रहा है।


1993 में मुम्बई के सीरियल ब्लास्ट पर आधारित फिल्म में एक ईमानदार पुलिस अफसर की भूमिका को रेखांकिन्त किया गया हैं। इसी फिल्म को दिखाकर उनमें खाकी का समय के साथ बदलाव कैसे किया जाता है यह सिखाने का प्रयास किया गया है।
पुलिस कप्तान विभाग एवं पुलिस की छवि सुधारने के लिए नवाचार का प्रयोग लगातार कर रहे है। सामुदायिक पुलिसिंग से आम जनता को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं। अपराध और अपराधियों पर अकुंश लगाने में जनता की भागीदारी तय करने का बीड़ा उठा रखा है।इसके पहले भी पुलिस की ईमानदार छवि को साबित करने के लिए निर्देशक रोहित सेट्ठी द्वारा सिंघम फ़िल्म बनाई गई थी और इसके पहले भी कई फिल्में बनी है।वर्तमान में सूर्यवंशी फ़िल्म भी इसी की कड़ी है फ़िल्म से खाकी वाले क्या सबक लेते है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, पर कप्तान की कोशिश रंग जरूर ला रही है और कुछ हद तक कर्मचारियों के स्वभाव व कार्यशैली में सुधार आया है। सुधार करना भी निरंतर एक प्रक्रिया है कप्तान की उम्मीदें बरकरार है और परवान चढ़ाना कर्मचारियों व मातहत कर्मचारियो की भूमिका पर निर्भर है।

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