The duniyadari news.यूपी के कौशांबी में पुलिस ने लोन के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के चार लोगों को अरेस्‍ट किया है। ये खुद बैंकों में काम करते थे लेकिन जालसाजी करके 5 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके थे। बैंक कर्मचारी होने के कारण इन्‍हें लोन प्रक्रिया की अच्‍छी समझ थी, आरोपियों ने इसी का फायदा उठाया। पुलिस ने सभी आरोपियों को अंसल प्‍लाजा मॉल के पास से अरेस्‍ट किया।
पुलिस के अनुसार, मुख्‍य आरोपी कुलदीप सिंह अपने साथियों विनोद कुमार, सुनील कुमार, विनोद कुमार उर्फ आलोक के साथ मिलकर ठगी कर रहा था।
कौशांबी थाना प्रभारी अजय सिंह ने बताया कि यह गिरोह प्राइवेट बैंकों को टारगेट करता था। यह लोग पहले बैंक लोन लेने वालों की तलाश करता था। उसके बाद उन्हें झांसे में लेकर लोन के लिए जरूरी कागजात सैलरी स्लिप, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि हासिल कर लेता था।
बैंककर्मियों से मिलीभगत थी
इसके बाद इन कागजों से खाता खुलवाकर उसमें 8 से 10 महीने तक हर महीने हजारों रुपये वेतन के तौर पर जमा किए जाते थे। फिर आरोपी इस खाते के आधार पर अलग-अलग बैंकों में डायरेक्ट सेल्स एजेंसी के माध्यम से पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते थे। बैंकों के एग्जिक्यूटिव से मिलकर फर्जी तरीके से वेरिफिकेशन कराकर लोन लेकर बैंकों को किस्त देना बंद कर देते थे। आरोपी बजाज फाइनैंस लिमिटेड, आईडीबीआई, यस बैंक, कोटक महिंद्रा आदि से लोन लेकर चूना लगा चुके हैं।
एक ही फोटो से बनाते थे कई कागजात
आरोपी एक ही शख्स की फोटो एडिट कर कई अन्य लोगों के रूप में दिखाकर कागजात तैयार करते थे। पहचान-पत्रों से फोटो निकालकर उसे बदलने में भी माहिर हैं। ये लोग कई सरकारी विभागों में नौकरी का ऑफर लेटर, सैलरी स्लिप व आईकार्ड दिखाकर बैंक से लोन ले चुके हैं। पुलिस ने आरोपियों से 25 हजार कैश, तेलंगाना में सरकारी नौकरी का ऑफर लेटर, 13 पैन कार्ड, 13 चेकबुक, मुहर, पेन ड्राइव, पे-स्लिप बुक, कोड बुक, ऑफर लेटर, 150 फोटो, दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल का आईकार्ड, प्रिंटर, टूरिज्म कार्ड, भारत सरकार के स्टिकर, 11 मोबाइल, डोंगल, फोटो कॉपी आदि सामान मिला है।
बदल देते थे ठिकाना
गिरोह रकम हासिल करने के लिए पहले उस इलाके या थोड़ा दूर किराए पर फ्लैट या मकान लेते थे। उसके बाद वहां से लोन हासिल करते ही गायब हो जाते थे। इससे वे पकड़ में नहीं आ रहे थे। पुलिस का कहना है कि इस मामले में बैंकों से जानकारी मांगी गई है। उन खातों को फ्रीज कराया जाएगा।
बैंक कर्मचारियों पर उठ रहे सवाल
गिरोह सामने आने के बाद बैंकों की संलिप्तता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, छानबीन में सामने आया है कि बैंकों से जब एग्जिक्यूटिव वेरिफिकेशन के लिए आते थे, तब ये उसे लालच देकर अपने साथ मिला लेते थे। थाना प्रभारी अजय सिंह का कहना है कि बैंकों से भी इस बारे में जानकारी ली जा रही है। बैंक कर्मचारियों पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि आम तौर पर बैंक कागजात आदि की गहरी पड़ताल के बाद लोन देते हैं। ऐसे में आरोपियों को एक के बाद एक लोन कैसे मिलते गए। इसमें जानबूझकर लापरवाही तो नहीं की गई, इस बारे में पुलिस जांच कर रही है।