मदनपुर के जंगल में मिली पंजों के फर को पैराशूट की तरह इस्तेमाल करके उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी

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कोरबा। पंजों के फर को पैराशूट की तरह इस्तेमाल करके उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी कोरबा वन मंडल के मदनपुर क्षेत्र में जख्मी अवस्था में वन विभाग कोमिली है। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अफसरों ने मौके पर पहुंची और गिलहरी को लेकर उसे पशु चिकित्सक से इलाज कराया कराने बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी भेजने की बात कही है। इससे पूर्व भी जंगल में कई तरह के विलुप्त प्रजाति के जंगली जानवर पाए जा चुके हैं जो जंगल के लिए अच्छी खबर है लगातार तरह-तरह के वन्य प्राणियों के मिलने से यह साफ है कि इस क्षेत्र में बेहतर जलवायु होने की वजह से जंगली जानवरों का बसेरा बना हुआ है। जनकरी के मुताबिक यह गिलहरी ज्यादातर ओक, देवदार और शीशम के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाती हैं. सुनहरे, भूरे और स्याह रंग में उड़न गिलहरियां देखी गई हैं. गले पर धारी होने के कारण स्थानीय लोग पट्टा बाघ भी इनको कहते हैं. पहले इन गिलहरियां की तादात ज्यादा थी लेकिन कटते जंगल और ग्लोबल वार्मिंग के चलते इनकी तादात कम होने लगी है. अब ये वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के शेड्यूल-2 में दर्ज है।