कोरबा। कोयला के जले राख की देन अस्थमा बीमारी से जूझ रहे सांस लेने में परेशान लोगों के लिए कोरोना मौत का पैग़ाम साबित हो रहा। इसके बाद भी
ट्रकों में ओवर लोड राख भरकर परिवहन किया जा रहा है। बालको राखड़ डेम से भारी पैमाने पर ट्रक ओवर लोड करके राख का परिवहन रिस्दी से उरगा के रास्ते हो रहा है। इनमें अधिकांश वाहन ब्लैक स्मिथ कम्पनी के हैं, जिसमें ट्रक की क्षमता से ज्यादा राख ढुलाई की जा रही है। वाहनों की क्षमता 16 मीट्रिक टन होती है, लेकिन इनमें 20 मीट्रिक टन राख भरी जा रही है। पुलिस भी ओवर लोड वाहनों की जांच नहीं कर रही।
ओवरलोड वाहन मुख्य मार्ग से होते हुए ग्रामीण अंचलो के खाली पड़े जमीनों तक पहुँच रही है। जंहा राख खुले में डम्प किया जा रहा है । ओवर लोड वाहनों के चलने से सड़कें तो खराब हो ही रही हैं वही आम लोगो का इस सड़को से चलना दूभर हो रहा हो रहा है। राख डम्प करने को लेकर तरदा व भलपहरी के ग्रामीण कई बार आंदोलन कर चुके है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियो के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा । अब ग्रामीण अपने हल में जीवन जीने मजबूर है। कोरबा को भारत की ऊर्जा राजधानी भी कहा जाता है। ये दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शुमार है। वजह है, यहां खदानों से कोयला निकालने से लेकर बिजली उत्पादन करने तक में निकलने वाली कोयले की राख। कमोबेश यही हाल पावर प्लांट संचालित दूसरे राज्यों में भी है। लेकिन गाड़ियों तो खुले में राख उड़ाती जाती हैं, इस सवाल के जवाब गोल मोल है क्योकि जिम्मेदार ही राख परिवहन करने वाले ठेकेदारों के रक्षक बने है।

 

पूर्व गृहमंत्री ननकी राम ने पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप
क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने उरगा पुलिस पर राख परिवहन करने वाले लोगो को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया है।
भलपहरी गांव में आंदोलन के बाद भी ब्लेक स्मिथ के अवैध राखड़ भराव पर रोक नहीं लगाना उरगा पुलिस की भ्रष्ट कार्य प्रणाली का उदाहरण है। उन्होंने भलपहरी में राखड़ भराव पर तुरन्त रोक लगाने की मांग जिला और पुलिस प्रशासन से की है।