0खरीदारों में कई ऐसे जिनके यहां पड़ा था आयकर छापा

रायपुर । देशभर में जब कोरोना के कारण धंधा चौपट था, बाजार में लिक्विड (कैश) खत्म हो चुका था।
जमा-जुमाया कारोबार लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया तब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करोड़ों की जमीन का सौदा हो गया। सौदा करने वालों में वे लोग थे जिनके यहां इंकम टैक्स का सर्वे और छापा हुआ और कुछ भी नहीं निकला।
उन्हीं लोगों ने चंद महीनों बाद ही राजधानी की सबसे महंगी-मंहगी जमीन और बिल्ंिडग खरीदते-बेचते रहे। इसमें डॉक्टर परिवार, कारोबारी, पॉलिटीशियन और उनके करीबी पार्टनर शामिल हैं।
कटोराताला, सिविल लाइन, फुंडहर, छेरीखेड़ी, वीआईपी रोड, अमलीडीह और धरमपुरा की महंगी जमीनों का मुंहमांगे दाम पर सौदा हुआ। मजे की बात यह कि लॉकडाउन के नुक्सान और कोरोना संक्रमण काल में हुई इस डील का आंकड़ा तकरीबन 600 करोड़ का बताया जाता है।
जमीन कारोबारियों के बीच इस कच्चे के सौदे की पक्की खबर अब आयकर विभाग तक पहुंच गई है। आईटी इन्वेस्टिगेशन विंग भी करोड़ों के हुए सौदे और सबसे ज्यादा उन लोगों व्दारा खरीदने से भौचक्क है जिनके यहां जांच कार्रवाई व दबिश के दौरान कोई बड़ी कर चोरी नहीं मिली। एक बार फिर बाजार में उड़ रहे इस सौदे की खबर के बाद आईटी विभाग की पैनी नजरें लगी हुई हैं।
कच्चे-पक्के में सौदे का राज
खरीदार और बिकवाल के बिचौलियों की मानें तो राजधानी के प्राइम लोकेशन की जमीनों, भवनों और व्यवसायीक प्रतिष्ठानों का सौदा तो तकरीबन 600 करोड़ का हुआ है। लेकिन मुंहमांगे दाम पर खरीदी गई प्रॉपर्टी की पेमेंट कच्चे और पक्के में की गई है। ताकि आईटी की जांच में फिर एक बार महमके की जांच टीम को कार्रवाई की स्थिति में जवाब दिया जा सके।