जयपुर। कोरोना (Corona) काल में लॉकडाउन (Lockdown) खुलने पर राजस्थान सहित देशभर में सबसे पहले शराब की दुकान खोलने और उससे मिलने वाले राजस्व को लेकर चर्चाए थी लेकिन अब शराब से व्यवसाय से जुडे़ लोगों ने सरकार (Rajasthan Government) और आबकारी विभाग (Excise Department) पर गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन की बात कर रहे हैं. साथ ही दस सूत्रीय मांगों को लेकर अर्दनग्न होकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.शराब ठेकेदार यूनियन की ओर से शराब ठेकों में गारंटी की बात समाप्त करने सहित दस सूत्रीय मांगों को लेकर शराब ठेकेदार सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदेशभर से शहीद स्मारक पर जुटे शराब व्यापारियों ने अर्दनग्न होकर प्रदर्शन किया और सीएम हाउस की तरफ कूच किया लेकिन बीच में ही पुलिस ने रोक लिया. लिकर कॉन्ट्रेक्टर यूनियन राजस्थान (Liquor Contractor Union Rajasthan) के प्रदेशाध्यक्ष पंकज धनखड़ (Pankaj Dhankhar) ने कहा की लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद शराब ठेकेदारों पर शराब बेचने का दबाव बनाकर उनसे माल उठवाया था. इस कारण कई ठेकेदार माल उठाने के बाद नहीं बिकने से आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैं.

इस अंतराल में 10 प्रतिशत से कम उठाव होने के बावजूद सरकार दबाव बना रही है कि शराब उठाई जाए नहीं तो घरों और संपतियों की निलामी की जाएगी. ऐसे में उनके पास दुकान छोड़ने और आर-पार की लड़ाई करने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है. शराब ठेकेदारों की आर्थिक हालत बहुत ज्यादा खराब होने से सेल्समेन्स को तनख्वाह तक नहीं दे पा रहे हैं. आबकारी विभाग के अधिकारी हालत में भी शराब ठेकेदारों को रियायत देने के बजाय उन्हें धमकाकर मंथली वसूल रहे हैं.

शराब ठेकेदार यूनियन की ओर से शराब ठेकों में गारंटी की बात समाप्त करने, नई शराब नीति में निलामी बोली होने के कारण कम्पोजिट फीस हटाने, सभी प्रकार के राईडर हटाने, देशी शराब में बीएसएफ को एक्साईज में शामिल करने, अंग्रेजी शराब में बिलिंग पर 22 प्रतिशत कमीशन करने, अंग्रेजी शराब में पैलेन्टी पिछले वित्त वर्ष की तरह बीयर पर 10 रुपये प्रति लीटर और आईएमएफएल में 20 रुपये प्रति बल्क लीटर करने, दुकान खोलने का समय सुबह 10 से रात 10 बजे तक करने, 2006 की नीति अनुसार एकमुश्त परमिट फीस लेने और आरएसबीसीएल और आरटीडीसी की तर्ज पर अनुज्ञाधारी को दुकान छोड़ने की अनुमति देने की मांग की जा रही हैं.
कोरोना का असर आमतौर पर हर व्यापारी पर पड़ा है लेकिन इसके साथ ही सबसे ज्यादा परेशानी शराब के ठेकेदारों के सामने खड़ी हो गई है. ठेकेदारों को एक तरफ सरकार को दी गई गारंटी पर खरा उतरना है. वहीं, पिछले सालों की तुलना में शराब की बिक्री में बेतहाशा कमी आई है. ऐसे में ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति खड़ी हो गई है.