कोरबा। डामर की सड़क के गड्ढों को पाटने के लिए नगर निगम ने बिल्कुल नई तकनीकी का अविष्कार किया है। डामर की सड़क में बारिश के कारण बने गड्ढों कोे मिट्‌टी से पाटा जा रहा है और  इसे बराबर भी नहीं किया जा रहा है। वाहन के चक्के गड्ढों में डाले गए मिट्टी के टीलों पर चढ़ रहे हैं और Automatically लेबलिंग का काम भी हो रहा है। इस इस दौरान थोड़ी बारिश होने पर गड्‌ढे कीचड़ में बदल जाये तो शराबियों को भी बहाना मिल जाएगा कि “अरे भाई नाली में नहीं गिरा था, वो तो निगम ने सड़क पर मिट्टी डाली थी, उसी में गिरा था…दाग अच्छे हैं। ”
बालको मार्ग की सड़कों पर बने गड्ढे की सुंदरता बढ़ाने इन दिनों गड्ढे में मिट्टी डाला जा रहा है। वही सीएसईबी अपने कालोनियों की सड़कों पर सीमेंट और गिट्टी डालकर मरम्मत कर रहा है। इन दोनो मार्गो को लेकर अब सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है आखिर सड़को की दुर्दशा का सवाल जो हैं।अमुमन बरसात के दिनों में सड़क पर गड्डा हो ही जाता है और तब वह और बड़ा गड्डा बन जाता है जब कोरबा की सड़क हो। नगर निगम कार्यालय से मजह 1 किलोमीटर की दूरी पर बालको मार्ग में सड़क पर बने गड्ढे पर मिट्टी भरा जा रहा है वो भी एक गड्डा छोड़कर और वही पर पास में ही वही सी.एस.ई.बी. की एक सड़क जो कालोनीवासियों के लिए बनाई गई है। वंहा की सड़कों में मिट्टी न डालकर सीमेंट और गिट्टी डालकर मरम्मत कार्य किया जा रहा है। काम वही है, गड्ढा भी सड़क पर है , ऐसा नहीं है कि कोई गड्ढा सड़क पर है और कोई गड्ढा आसमान में है। बस काम करने की सोच भिन्न है।

खैर निगम आयुक्त महोदय का भी अपना काम करने  का अलग विजन है वे कहते है निर्माण कार्य वर्षा ऋतु के बाद शुरू होगा। ये बात अलग है कि खुद के बंगले की मरमम्त भले ही भरी बरसात में तिरपाल तान कर करा लिए हो। खैर सीएसईबी के सड़को पर एन बारिश के मौसम में जो सीमेन्ट गिट्टी डालने का खेल चल रहा है उसमें भी कुछ लोचा जरूर है। या यूं कहें बारिश के बाद  फिर से मरम्मत कराने का अलग से टेण्डर निकाला जाएगा।