कोरबा। एक तरफ सूबे के मुखिया भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति को सहेजने का प्रयास के रहे हैं तो दूसरी तरफ बालको स्थानीय कलाकारों की अनदेखी कर रहा है। हम बात कर रहे हैं बालको के स्थापना दिवस पर होने वाले लोक कला महोत्सव की।

बता दें कि 1991 से अनवरत चल रहे लोक कला महोत्सव को कुछ वर्ष पहले बंद कर स्थानीय कलाकारों की अनदेखी कर रहा है। लोक कला महोत्सव को शुरू करने स्थानीय कलाकारों ने कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की मांग की है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष रूचि के चलते राज्य में छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति एवं परम्पराओं को जीवंत बनाए रखने का सार्थक प्रयास शुरू हो गया है। सरकारी संरक्षण के चलते कला और संस्कृति के पुष्पित एवं पल्लवित होने का अनुकूल वातावरण निर्मित तो हो रहा है पर अभी भी प्रदेश के उद्योग घरानों का रुझान स्थानीय कला के प्रति नहीं जगा सका है। यही वजह है बालको के सौजन्य से चल रहे लोक कला महोत्सव को बंद कर दिया गया है।

हालांकि राज्य में विभिन्न अवसरों एवं तीज-त्योहारों के मौके पर कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों एवं कलाकारों को बीते दो सालों से लगातार मंच मिलने से उनमें उत्साह जगा है। इसके बाद भी बालको के स्थानीय कला की अनदेखी से स्थानीय कलाकारों का मनोबल टूटता दिख रहा है।

जिले के लोक कलाकारों ने बालको प्रबंधन से अपने सामाजिक दायित्व कार्यक्रम में लोक कला महोत्सव को शामिल कर स्थानीय कलाकारों को मौके देने की अपील की है।