कोरबा। डीईओ सतीश पांडेय का अनोखा फरमान एक बार मे चर्चा में है। जारी आदेश के मुताबिक जिन शिक्षकों की ड्यूटी दूसरे कार्य मे लगी है उन्हें छोड़करसारे शिक्षक/ व्याख्याता प्रतिदिन नियमित रूप से विद्यालय आएंगे। इस आदेश की जमकर चर्चा हो रही है।


कोरोना काल में नियमों को अपने काम और जरूरत के अनुसार बनाया और तोड़ा जा रहा है। इससे भय, आक्रोश और दुविधा के हालात बन रहे हैं। जब किसी परिवार में एक भी सदस्य के संक्रमित आने पर उसे अलग कर शेष सदस्यों को भी आइसोलेट ही रहना है, बाहर नहीं निकलना है और कोई निकल गया तो एफआईआर हो रही है तब ऐसे में शिक्षा विभाग अपना अलग निर्देश जारी कर रहा है।
वर्चुवल बैठक के बाद शिक्षकों को भेजे जा रहे आवश्यक सूचना में जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के हवाले से कहा जा रहा है कि बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश–
1.जिन शिक्षकों की अन्य कार्यों में ड्यूटी लगी है उन्हें छोड़कर बचे हुए सारे शिक्षक/ व्याख्याता प्रतिदिन नियमित रूप से विद्यालय आएंगे।
2.विद्यालय आकर एक्टिव सर्विलेंस के कार्य में सहयोग करेंगे।
3.प्रतिदिन लगभग 50 घरों का एक्टिव सर्विलेंस करना है। दिए गए प्रपत्र में जानकारी जमा की जानी है।
4.नो वर्क नो पेयमेंट के सिद्धांत पर कार्य किया जाएगा। प्रत्येक शिक्षक को ड्यूटी करना आवश्यक है। उपस्थिति पत्रक के हस्ताक्षर के आधार पर ही वेतन आहरण किया जाएगा।
5.केवल कोविट पॉजिटिव शिक्षकों को ही 14 दिन का अवकाश दिया जाएगा। घर में किसी के पॉजिटिव आने के कारण शिक्षकों को होम आइसोलेशन नहीं मिलेगा। शासकीय कर्मचारियों को कर्तव्य स्थल पर आना ही है।
5.मेडिकल लिव देने वाले सभी शिक्षकों को मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा।
6. राष्ट्रीय विपदा की इस घड़ी में सभी शासकीय कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण इमानदारी से किए जाने की अपेक्षा की जाती है।