कोरबा।जिला शिक्षा अधिकारी के नो वर्क नो पेमेंन्ट के फरमान के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने उक्त आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं। संघ के अध्यक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मौखिक आदेश को वापस लेने की मांग की है।

 


जिला शिक्षाधिकारी सतीश पांडेय ने वर्चुअल बैठक में शिक्षकों के लिए एक मौखिक आदेश देते हुए कहा था ,कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी दूसरे कार्य मे लगी है उन्हें छोड़कर सारे बचे हुए सारे शिक्षक/ व्याख्याता प्रतिदिन नियमित रूप से विद्यालय आएंगे।विद्यालय आकर एक्टिव सर्विलेंस के कार्य में सहयोग करेंगे।प्रतिदिन लगभग 50 घरों का एक्टिव सर्विलेंस करना है। दिए गए प्रपत्र में जानकारी जमा की जानी है।नो वर्क नो पेयमेंट के सिद्धांत पर कार्य किया जाएगा। प्रत्येक शिक्षक को ड्यूटी करना आवश्यक है। उपस्थिति पत्रक के हस्ताक्षर के आधार पर ही वेतन आहरण किया जाएगा।केवल कोविट पॉजिटिव शिक्षकों को ही 14 दिन का अवकाश दिया जाएगा। घर में किसी के पॉजिटिव आने के कारण शिक्षकों को होम आइसोलेशन नहीं मिलेगा। शासकीय कर्मचारियों को कर्तव्य स्थल पर आना ही है,मेडिकल लिव देने वाले सभी शिक्षकों को मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर मेडिकल सर्टिफिकेट देना होगा। राष्ट्रीय विपदा की इस घड़ी में सभी शासकीय कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण इमानदारी से किए जाने की अपेक्षा की जाती है। इस आदेश के बाद शिक्षकों में जमकर आक्रोश है। आदेश जारी होने के बाद शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे है। उक्क्त आदेश को वापस लेने को मांग को लेकर छहत्तीसगढ़ प्रदेश सयुंक्त शिक्षक संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।