कोरबा। बुधवार को कलेक्टर द्वारा डीएमएफ की ली गई वर्चुअल बैठक पर सवाल खड़े हो गए है। सत्ता पक्ष के एक पार्षद ने बैठक को लेकर प्रशसान पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला खनिज न्यास परिषद की बहुप्रतीक्षित बैठक लंबे समय बाद आहूत की गई । बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों की नजर टिकी हुई थी।किंतु यह पहली बैठक है जो प्रत्यक्ष न होकर वर्चुअल रखी गई , जबकि जिला प्रशसान में जितनी भी बैठके जिसमे कलेक्टर द्वारा ली जाने वाली साप्ताहिक समीक्षा बैठक भी शामिल है।उक्त सभी बैठके कलेक्टोरेंट सभा कक्ष में सीधे प्रत्यक्ष रूप से हो रही है।तो फिर ऐसा क्या कारण था कि कलेक्टर ने डीएमएफ की इस बैठक को प्रत्यक्ष न लेकर वर्चुअल ली है। लगभग आधा घंटा चली डीएमएफ की इस वर्चुअल बैठक को लेकर विपक्षी दल नही बल्कि सत्ता पक्ष कांग्रेस के पार्षद सुरेन्द्र जायसवाल ने सवाल खड़ा करते हुए बैठक को प्रत्यक्ष तरीके से लेने का बयान जारी किया है। श्री जायसवाल के इस बयान से जिला प्रशसान की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।
ये कहा जायसवाल ने..
प्रस्तावित विकास कार्यों को शासी परिषद की बैठक में स्वीकृति प्रदान की जाती है। करीब सात माह बाद बुधवार को बैठक आयोजित की गई है। कांग्रेस की सरकार राज्य में आने के बाद से प्रभारी मंत्री शासी परिषद की अध्यक्षता करते रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने नियम में बदलाव करते हुए कलेक्टर को यह अधिकार प्रदान कर दिया है। प्रस्तावित इस बैठक को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए सदस्य सुरेंद्र प्रताप जायसवाल ने कलेक्टर रानू साहू को पत्र लिखा है, इसमें उन्होंने कहा है कि 13 सितंबर को बैठक की सूचना प्राप्त हुई, लेकिन इसके साथ एजेंडा नहीं दिया गया। इस वजह से कार्य योजनाओं से वे अवगत नहीं हो पाए हैं। नगरीय निकाय सदस्य के रूप में मुझे शामिल किया गया है, चूंकि कोरबा नगर पालिक निगम का संपूर्ण क्षेत्र खनिज प्रभावित क्षेत्र है, इसलिए यहां होने वाले विकास कार्यों की जानकारी के अभाव में जिम्मेदारी पूर्वक बैठक में हिस्सा लेना संभव नही है। कलेक्ट्रेट में टीएल की बैठक हो या फिर अन्य शासकीय बैठक हो। सभी वर्चुअल के स्थान पर प्रत्यक्ष रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इसलिए इस बैठक को भी प्रत्यक्ष रूप से आयोजित किया जाना चाहिए था। जायसवाल ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि कार्य योजना उपलब्ध कराने के साथ प्रत्यक्ष बैठक आयोजित की जाए।