रायपुर । पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के सीएमडी पवन देव के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने राज्य शासन की ओर से लगाए गए आरोप पत्र को खारिज कर दिया है। यह आरोप पत्र शासन ने एक महिला आरक्षक द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में पवन देव को दिया था। इसे लेकर कैट ने तल्ख टिप्पणी की है कि जब आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट आ चुकी है, फिर नए सिरे से आरोप पत्र देकर जांच की जरूरत क्यों पड़ रही है? कैट ने इसे हाईकोर्ट के पूर्व में दिए निर्देश की अवमानना भी बताया है।
दरअसल, यह पूरा मामला आईपीएस पवन देव के बिलासपुर आईजी की पोस्टिंग के दौरान का है। बिलासपुर रेंज के अंतर्गत एक थाने में पदस्थ महिला आरक्षक ने उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 30 जून 2016 को मामले की शिकायत हुई थी, जिसके बाद शासन की ओर से आंतरिक जांच समिति बनाई गई थी। इस समिति ने 2 दिसंबर 2016 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इस बीच महिला आरक्षक ने हाईकोर्ट ने जनहित याचिका लगाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद 19 अप्रैल 2018 को शासन ने पवन देव को आरोप पत्र थमा दिया। इस आरोप पत्र को पवन देव ने कैट में चुनौती दी। पूरे मामले की सुनवाई के बाद कैट ने आरोप पत्र को खारिज कर दिया। कैट के ज्यूडिशियल मेंबर रमेश सिंह ठाकुर और एडमिनिस्ट्रेटिव मेंबर नैनी जयासीलन ने कहा है कि जब मामले की जांच हो चुकी है और अंतिम रिपोर्ट आ गई है, फिर नई जांच कराने के बजाय कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बने 2013 में लागू कानून के आधार पर आगे जांच करनी चाहिए। इस कानून के नियम 8(2) आंतरिक जांच समिति को अहम माना गया है। इसके बावजूद नए सिरे से जांच कराने के बजाय आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करें।