कोरबा। बिना सक्षम अधिकारी के टी.एस. कर निविदा प्रकाशन करने के मामले ने तुल पकड़ा तो  आदिवासी विभाग ने टेंडर निरस्त कर दिया और इस तरह से विभाग एक बार अनबूझे प्रश्नों से घिर गया है।

दरअसल आदिवासी विभाग में लगभग 1 करोड़ 75 लाख की निविदा आमंत्रित की गई थी। जारी किये गए निविदा में सक्षम अधिकारी से टी.एस. नही लिया गया था और इस प्रकार से अवैध तरीके से निविदा का प्रकाशन कर दिया गया। निविदा प्रकाशन के बाद आपत्ति दर्ज कराने पर निविदा को निरस्त कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो अब तक आदिवासी विभाग जितने भी निविदा जारी किए गए हैं। उसे एस.डी.ओ. यानि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी किया गया हैं , टेंडर हुआ भी और काम के बाद चेक भी नियमों को ताक में रखकर काटे गए है। मतलब साफ है अब तक जितने भी आदिवासी विभाग में निर्माण कार्य हुए है सभी नियमो के विपरीत हुए है क्योकि अब  टेक्निकल सेक्सन की शिकायत पर टेण्डर निरस्त हुआ है,तो पुराने कामो का क्या होगा जो नियम विरुद्ध हुए है, जो कि जांच का विषय है।

क्या है नियम…

टेंडर प्रक्रिया के जानकारों की माने तो कोई भी निर्माण कार्य ई. ई.लेबल के अधिकारी के हस्ताक्षर से होता है। एस.डी.ओ. को सिर्फ और सिर्फ मूल्यांकन को सत्यापित करने का अधिकार है। इसके बाद भी विभाग द्वारा जानबूझकर लगातार नियमो की अनदेखी कर उल्टे सीधे कार्य करता रहा है। हाल में हुए निरस्त टेंडर के संदर्भ में पी.डब्ल्यू.डी. के कार्य पालन अभियंता की अनुशंसा पर फिर से निविदा जारी करने की बात कही जा रही है।