Friday, May 24, 2024
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डीएमएफ मद यानि सेटिंगबाजों का पंचायती राज…बीट प्रभारियों के साथ एसपी की बैठक और थानेदारों की टेंशन

डीएमएफ मद यानि सेटिंगबाजों का पंचायती राज

कोरबा नगरी में खनिज न्यास मद सेटिंगबाजों की होकर रह गई है। निर्माण एजेंसियों के जिम्मेदार चुपचाप दफ्तर में बैठे हैं और ग्राम पंचायत के सरपंच 20 लाख के दो नहीं चार पार्ट में काम कराकर तकनीकी विशेषज्ञ बन गए हैं। जिले में चल रहे इस कारनामे की चर्चा भी खूब हो रही है। आखिर पैसा तो पब्लिक का है और इस पर सभी का बराबरी का हक है।

पहले निर्माण एजेंसियों के माध्यम से काम होता था तो कार्य में गुणवत्ता के साथ साथ परफॉर्मेंस गारंटी भी मिलती थी और बिलों यानि अंतर की राशि भी बचती। यानि आम के आम और गुठलियों के दाम। अब अफसर दफ्तर बैठे बिल पासकर अपने अपने हिस्से की मलाई खा रहे हैं और नाम बदनाम सरपंचों को ढोना पड़ रहा है। कुल मिला कर अफसरों और सरपंचों ने अपनी अपनी सुविधा के लिए पंचायत राज की जो नई परिभाषा गढ ली है उसमें सभी डुबकी लगा रहे हैं। सभी को डीएमएफ का काम खूब भा रहा है।

बीट प्रभारियों के साथ एसपी की बैठक और थानेदारों की टेंशन

ऊर्जाधानी के ऊर्जावान एसपी खाकी की तस्वीर बदलने कई नए प्रयोग कर रहे हैं। बीट पुलिसिंग के लिए जिले के सभी थाना चौकियों के बीट प्रभारियों की बैठक तो बड़े साहब ले रहे हैं पर टेंशन थानेदारों का बढ़ गया है। टेंशन बढ़े भी क्यों न क्योंकि थाने की लाल किताब यानि थाने का हिसाब किताब तो इन्हीं के पास रहता है। थाने के साहब को अब ये डर सताने लगा है कि कहीं हमारी पोल साहब के सामने न खुल जाए। बात भी सही है, साहब तो कबीर वाणी पर विश्वास करते हैं और मुस्कुराते हुए जब कोई बात कहा जाए तो उसका असर सामने वाले पर पड़ता है। जाहिर है कप्तान साहब की बातों का कुछ न कुछ तो जरूर असर होगा। अगर ऐसा हुआ तो उनकी थानेदारी खतरे में पड़ जाएगी।

जब सड़क को देख याद आते हैं दिग्गी राजा

सीएसईबी चौक से दर्री गोपालपुर जाते समय ध्यानचंद चौक पहुंचते ही पुल पार करते और गोपालपुर जाते तक रोड के गड्ढ़ों में हिचकोले लेते ऐसा लगता कि सूबे में अभी भी है काका का नहीं, दिग्गी राजा का राज चल रहा है। लोग इन हिचकोलों से दिग्गी राजा को जरूर याद कर लेते हैं। करें भी क्यों न दरअसल सीएसईबी चौक से फर्राटे भरने वाली कार अचानक स्लो मोशन में वीसीआर की तरह अटक अटक कर चलने लगती है। सड़क तो दिग्गी राजा के कार्यकाल में भी ऐसे ही थी जैसे अभी है। चलो कम से कम सड़क के बहाने ही उन्हें लोग याद तो कर रहे हैं वरना लोग तो उन्हें भुला ही दिया है।

जब मिल बैठे दो पुराने यार बातें हुई चार

कोरबा प्रवास पर आए डॉ. महंत से भाजपा नेता की मुलाकात को लेकर कई तरह जिज्ञासा मन में उठती रही। उनकी प्रस्तावित रामपुर विधानसभा एवं इससे लगे सक्ती विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रवाना होने के लिए डॉ. चरणदास महंत और ननकीराम कंवर एक ही वाहन में सवार हुए। डॉ. महंत ने बड़े आत्मीयता से ननकीराम के लिए वाहन का दरवाजा खोला और उन्हें बिठाया। इस दौरान डॉ. महंत ने चुटकी लेते हुए ननकीराम कंवर से पूछा कि कोई ऐतराज न हो तो आपके क्षेत्र के पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर को भी साथ ले चलें! इस पर ननकीराम कंवर ने हंसते हुए कहा कि वे रामपुर के पूर्व विधायक के साथ-साथ मेरे साढू भाई भी हैं और इस पूरे हास्य-विनोद के मध्य श्यामलाल कंवर भी उसी वाहन में सवार हुए और तीनों दौरे के लिए निकल पड़े।

राजधानी में क्या हुआ तेरा वादा, ये शराब है बड़ी मस्त मस्त

प्रदेश की राजनीति इन दिनों शराब बिक्री बंद किए जाने को लेकर गरमाई हुई। कांग्रेस भाजपा को निशाना बना रही है तो दुकानों में शराब की शौंकीन ये शराब है बड़ी मस्त मस्त गा कर दोनों का मजा ले रहे हैं। पीसीसी अध्यक्ष मोहन आदिवासी जनसंख्या का हिसाब किताब बना कर शराब को जरूरी बता रहे हैं तो नेता प्रतिपक्ष धरम… क्या हुआ तेरा वादा,क्या हुआ तेरा वादा, क्या है तेरा इरादा जैसे सवाल पूछकर लगातार कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। लेकिन दारू ठेका चलाने वाले भी अच्छे से जानते हैं बाहर भले ही राग अलग अलग हो पर अंदर खाने में …….सभी हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला के ​दीवाने हैं …….सच कहा है बच्चनजी ने पार्टी कोई भी …..मेल कराएगी मधुशाला…..

 

                              अनिल द्विवेदी , ईश्वर चन्द्रा

 

 

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