एक शहर, दो पूर्व प्रधानमंत्री, लेकिन सम्मान अलग-अलग

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The Duniyadari :डोंगरगढ़ | शहर में इन दिनों दो राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग रवैये की तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसने प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है। एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भव्य व्यवस्था और सुरक्षा के बीच स्थापित की गई, वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा लंबे समय से क्षतिग्रस्त हालत में खड़ी है।

25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर सजावट, सुरक्षा घेरा और निगरानी व्यवस्था की गई। आयोजन को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी खास तैयारी नजर आई। इसके विपरीत, शहर के प्रमुख हाई स्कूल परिसर में स्थित इंदिरा गांधी की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा कई बार नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन अब तक न तो स्थायी मरम्मत कराई गई और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हुए।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रही। न प्रतिमा की समय पर मरम्मत हुई और न ही दोबारा क्षति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए।

मामले पर थाना प्रभारी संतोष जायसवाल ने बताया कि शहर में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है और पुलिस गश्त जारी है। वहीं हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य जागेश्वर चंदेल ने कहा कि प्रतिमा की स्थिति की जानकारी नगर पालिका को दी जा चुकी है। नगर पालिका अधिकारी खिलेंद्र भोई ने मरम्मत का आश्वासन दिया है, हालांकि फिलहाल मौके पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।

अब यह मुद्दा केवल प्रतिमा की देखरेख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या राष्ट्रीय नेताओं के सम्मान में भी राजनीतिक नजरिया हावी हो रहा है। शहरवासी चाहते हैं कि देश के दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों के सम्मान में समान संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाई जाए।