Saturday, May 2, 2026
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एलपीजी गैस घोटाला: 100 टन गैस की हेराफेरी, करोड़ों का नुकसान, एक आरोपी गिरफ्तार

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The Duniyadari: महासमुंद Police ने एक बड़े एलपीजी घोटाले का खुलासा करते हुए लगभग 100 मीट्रिक टन गैस की अवैध हेराफेरी का मामला सामने लाया है, जिसकी कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने शनिवार को प्रेस वार्ता में बताया कि एक निजी पेट्रोकेमिकल कंपनी के मालिक, डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर पर मिलकर साजिश रचने का आरोप है।

जांच में सामने आया कि 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच छह एलपीजी कैप्सूल ट्रकों से चरणबद्ध तरीके से गैस निकाली गई। हर कैप्सूल से औसतन 15 से 17 टन गैस निकालकर कुल लगभग 100 टन गैस का गबन किया गया।

जीपीएस डेटा के आधार पर पुलिस ने पूरी गतिविधि का टाइमलाइन तैयार किया है। इसके अनुसार 31 मार्च को दो कैप्सूल, 1 अप्रैल और 3 अप्रैल को एक-एक कैप्सूल तथा 5 अप्रैल को दो कैप्सूल से गैस निकाली गई। प्लांट के कर्मचारियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उन्होंने यह काम उच्च अधिकारियों के निर्देश पर किया।

दस्तावेजों की जांच में भी बड़ा अंतर सामने आया है। अप्रैल महीने में 47 टन गैस खरीदी गई, जबकि 100 टन से अधिक गैस की बिक्री दर्ज की गई है। इस अंतर को लेकर पुलिस गहराई से जांच कर रही है।

साथ ही कुछ एजेंसियों द्वारा बिना वैध बिल के गैस खरीदने की बात भी सामने आई है, जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

यह पूरा मामला उस समय का है जब दिसंबर 2025 में जब्त किए गए छह एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षा के लिहाज से एक निजी प्लांट को सुपुर्द किया गया था।

जांच में पाया गया कि सुपुर्दगी के बाद ही इन ट्रकों से गैस निकाली गई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि सुपुर्दगी के दौरान वजन न कराने जैसी प्रक्रिया में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।

विशेषज्ञ जांच में कैप्सूल से गैस के लीकेज की संभावना से इनकार किया गया है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है। फिलहाल पुलिस ने विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।