Saturday, March 21, 2026
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किश्त नहीं भरने पर अगवा कर रातभर बेल्ट-डंडे से पीटा

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The Duniyadari: पिथौरा- छत्तीसगढ़ के पिथौरा थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बजाज फाइनेंस लिमिटेड से लिए गए ऋण की किश्त नहीं भरने पर एक युवक को अगवा कर बंधक बनाते हुए रातभर बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि फाइनेंस कंपनी के एजेंट और उसके साथियों ने पीड़ित को बेल्ट और डंडों से बुरी तरह पीटा, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।

घटना ग्राम बया निवासी नंदूराम सेन के साथ घटित हुई, जिसने बजाज फाइनेंस से 50 हजार रुपये का लोन लिया था। नंदूराम ने 30 हजार रुपये तक की किश्त चुका दी थी। इस बीच उसके बैंक खाते से 20 हजार रुपये अतिरिक्त कट गए, जिससे उसने यह समझा कि उसका लोन पूरा चुका हो गया है और आगे किश्तें नहीं भरीं।

इसी दौरान फाइनेंस कंपनी के एजेंट राजकुमार पटेल ने दावा किया कि उसने नंदूराम की तीन किश्तें अपनी जेब से भरी हैं और अब वह उससे पैसे की मांग कर रहा था। नंदूराम द्वारा विरोध करने पर एजेंट और उसके 5 साथियों ने मिलकर उसे ग्राम बया से अगवा कर ग्राम बरेकेलखुर्द के एक खेत में बने मकान में ले जाकर रातभर पीटा। पीड़ित ने बताया कि उसे बेल्ट और डंडों से मारा गया, जिससे शरीर पर जगह-जगह गंभीर चोटें आईं। उसने किसी तरह छूटकर पिथौरा थाना में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एजेंट राजकुमार पटेल सहित कुल 6 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 140(3), 127(2), 296, 115(2), 351(3), 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। चूंकि अगवा करने की घटना राजादेवरी थाना क्षेत्र से शुरू हुई थी, इसलिए पिथौरा थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर पूरा मामला राजादेवरी थाना स्थानांतरित कर दिया गया है।

एजेंटों की मनमानी पर उठे सवाल

इस घटना ने निजी फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एजेंटों द्वारा किस्त वसूली के नाम पर लोगों को धमकाना, बदसलूकी करना और मारपीट जैसी घटनाएं अब आम होती जा रही हैं।

पिथौरा की घटना भी इसी तरह की गुंडागर्दी का उदाहरण है, जहां एक ईमानदार व्यक्ति, जिसने अधिकांश किश्तें चुका दी थीं, को अगवा कर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाए और निजी फाइनेंस कंपनियों की निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि ग्रामीण अंचलों में आम नागरिकों को डर और शोषण से बचाया जा सके।