The Duniyadari : कोरबा। जिले के जंगल और ग्रामीण हिस्सों में इन दिनों जुआ कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। चोरी-छिपे चलने वाला यह धंधा अब खुले तौर पर फल-फूल रहा है, जिससे न सिर्फ ग्रामीण माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से बचती दिख रही है। इसी वजह से जुआ संचालकों के हौसले दिन-ब-दिन मजबूत होते जा रहे हैं।
गाँवों में दिनभर जमता खेल, रात को बढ़ती भीड़
सूत्रों के अनुसार, गोढ़ील, जंगल क्षेत्र, चाकामार और कोरकोमा के जंगलों में जगह-जगह अस्थायी अड्डे बना लिए गए हैं, जहाँ ताश के पत्तों का खेल लगातार चलता रहता है।
“52 पत्ती” का खेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय बताया जा रहा है और इसमें शामिल होने लोग आसपास के कस्बों से भी पहुंचते हैं।
एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर बताया—
“यहाँ दांव छोटे नहीं लगते, रोज़ाना लाखों रुपए घूमते हैं। हालत यह है कि हर घंटे मोटी वसूली होती है और पैसे का काला लेनदेन लगातार चलता रहता है।”
इन अड्डों में युवाओं की बढ़ती मौजूदगी से माता-पिता चिंतित हैं। आर्थिक नुकसान के साथ चोरी, नशाखोरी और विवाद की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं। महिलाओं का कहना है कि
“घर का पैसा जुए में बह रहा है, परिवार टूट रहे हैं… कोई सुनने वाला नहीं।”
प्रशासन की खामोशी पर ग्रामीणों के तीखे सवाल
लोगों का आरोप है कि यदि चाहें तो पुलिस चंद घंटों में इन अड्डों को खत्म कर सकती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।














