The Duniyadari : कोरबा, 16 दिसंबर। औद्योगिक नगरी कोरबा के इंदिरा नगर में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की जिंदगी इन दिनों भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। रेलवे प्रशासन द्वारा बस्ती के करीब 250 मकानों पर लाल निशान लगाए जाने के बाद इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया। मंगलवार सुबह गुस्साए लोगों ने पावर हाउस रोड पर चक्काजाम कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र की रफ्तार थम गई।
सुबह-सुबह सड़क पर उतरा गुस्सा
सोमवार को रेलवे की ओर से अंतिम चेतावनी मिलने के बाद मंगलवार तड़के बस्ती में बैठक हुई। बैठक खत्म होते-होते लोगों का सब्र टूट गया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में सड़क पर आ गए। पुराने पवन टॉकीज और उषा कॉम्प्लेक्स के पास पेट्रोल पंप के सामने प्रदर्शन शुरू होते ही यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
“गरीबों पर हथौड़ा, रसूखदार सुरक्षित”
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में खुला भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों के बड़े और पक्के मकानों को छेड़ा नहीं गया, जबकि वर्षों से बसे गरीब परिवारों की झोपड़ियों और छोटे घरों को तोड़ने के लिए नोटिस थमा दिए गए हैं। इसी दोहरे रवैये ने आंदोलन को और भड़का दिया।
बातचीत के दरवाजे बंद
सोमवार को जब पार्षदों के साथ बस्तीवासी रेलवे कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताले लटके मिले। लोगों का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर संवाद से बच रहे हैं। इससे हालात और बिगड़ गए और भरोसे की आखिरी कड़ी भी टूटती नजर आई।
दशकों की बसाहट, फिर भी बेदखली का डर
निवासियों का कहना है कि वे 40 से 50 साल से इसी जगह रह रहे हैं। उनके घरों में वैध बिजली कनेक्शन हैं, नगर निगम को नियमित टैक्स दिया जा रहा है और सरकारी सुविधाएं भी मिलती रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है—
“अगर हम अवैध हैं, तो फिर सालों तक टैक्स क्यों लिया गया?”
लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों और परिवार के भविष्य को लेकर है। बिना पुनर्वास और मुआवजे के उजाड़े जाने का डर उन्हें सड़क पर ले आया है।
जमीन का भविष्य खुद रेलवे को साफ नहीं
हैरानी की बात यह है कि जिन 250 परिवारों को हटाने की तैयारी है, उस जमीन के इस्तेमाल को लेकर खुद रेलवे के पास कोई ठोस योजना नहीं है। न यह स्पष्ट है कि वहां कॉलोनी बनेगी या यार्ड। बिना किसी तय प्रोजेक्ट के इतने बड़े विस्थापन की जिद ने जनप्रतिनिधियों से लेकर आम लोगों तक में नाराजगी बढ़ा दी है।
मौके पर पुलिस, लेकिन आंदोलन जारी
स्थिति को संभालने के लिए कोतवाली पुलिस तैनात है और लगातार लोगों को समझाने की कोशिश की जा रही है। बावजूद इसके बस्तीवासी एक ही मांग पर डटे हैं—
“पहले बसाने की ठोस व्यवस्था करो, फिर उजाड़ने की बात करो।”
रात भर चली बैठकों के बाद साफ है कि आंदोलन अब पीछे हटने को तैयार नहीं। इंदिरा नगर के लोग इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मान रहे हैं, और आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के संकेत दे रहा है।














