The Duniyadari : कोरबा, 21 दिसंबर 2025। जिले में पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर चल रही कथित अवैध वसूली आखिरकार सामने आ गई है। रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने एसपी कार्यालय में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मामला कोरबा एसपी कार्यालय के चरित्र सत्यापन शाखा से जुड़ा है, जहां प्रधान आरक्षक सूर्यकांत द्विवेदी की तैनाती थी। ढोढीपारा निवासी दीपक साहू ने सिविल लाइन थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि पुलिस वेरिफिकेशन प्रमाण पत्र जारी करने के बदले उससे एक हजार रुपये की मांग की जा रही है।
दीपक साहू रायगढ़ स्थित एनटीपीसी परियोजना में हाइड्रा ऑपरेटर के रूप में कार्यरत है। ठेका कंपनी द्वारा गेट पास के नवीनीकरण हेतु पुलिस वेरिफिकेशन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसी सिलसिले में वह आवेदन लेकर एसपी कार्यालय पहुंचा, जहां कथित तौर पर प्रधान आरक्षक ने तत्काल प्रमाण पत्र बनाने के बदले पैसे मांगे। रिश्वत देने से इनकार करते हुए दीपक साहू ने पूरे मामले की शिकायत थाने में कर दी।
शिकायत मिलने के बाद उप निरीक्षक प्रमोद चंद्राकर को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान आवेदक के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने आरोपों की पुष्टि की। पहचान प्रक्रिया में भी उसने स्पष्ट रूप से उसी प्रधान आरक्षक को चिन्हित किया, जिसने उससे धनराशि की मांग की थी। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर एसपी ने निलंबन की कार्रवाई की।
पुराने मामलों की जांच की उठी मांग
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि निलंबित प्रधान आरक्षक के पुराने कार्यकाल की जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। आरोप है कि बालको, एनटीपीसी, एसईसीएल सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत ठेका श्रमिकों को बिना समुचित आपराधिक जांच के ही पैसों के बदले चरित्र प्रमाण पत्र जारी किए गए।
बताया जा रहा है कि यह खेल केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि थाना स्तर से लेकर कार्यालयों तक इसकी जानकारी होने की चर्चा है। यदि जिले में जारी किए गए चरित्र प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच होती है, तो कई जिम्मेदारों पर कार्रवाई की आंच पहुंच सकती है।













