The Duniyadari: “चलो आयुर्वेद की ओर” मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए “बच्चे रहे स्वस्थ” योजनान्तर्गत नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा पतंजलि चिकित्सालय श्री शिव औषधालय महानदी काम्प्लेक्स निहारिका में दिनांक 28 फरवरी 2026 शनिवार को अति शुभ पुष्य नक्षत्र में आयुर्वेदिक इम्यूनाईजेसन प्रोग्राम के तहत स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कराया गया।

ऋतु परिवर्तन के समय में होने वाले दुष्प्रभावों से बचाता है स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार – डॉ.नागेंद्र शर्मा।
“चलो आयुर्वेद की ओर” मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए “बच्चे रहे स्वस्थ” योजनान्तर्गत पतंजलि चिकित्सालय श्री शिव औषधालय महानदी काम्प्लेक्स निहारिका में दिनांक 28 फरवरी 2026 शनिवार को अति शुभ पुष्य नक्षत्र में आयुर्वेदिक इम्यूनाइजेसन प्रोग्राम के तहत नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन ड्रॉप्स पिलाकर आयुर्वेद पद्धति से टीकाकरण किया गया।

स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार के लाभ के विषय में बताते हुये संस्थान के चिकित्सक डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि सर्दी के विदाई के साथ गर्मी का आगमन धीरे धीरे हो रहा है। ऋतु परिवर्तन के इस काल को संधिकाल कहते हैं । आयुर्वेद के अनुसार बाह्य प्रकृति में बदलाव आने के साथ साथ हमारे शरीर के अंदर भी परिवर्तन होने लगता है, जिसमे जरा सी भी असावधानी के कारण अनेक तरह के दुष्प्रभाव हमे शारीरिक रोग जैसे सर्दी, खांसी, बुखार वमन, अतिसार, चक्कर का आना आदि के रूप में प्रभावित करते हैं। जिसका ज्यादा असर बच्चो में देखने को मिलता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। और वे ऋतुओं के परिवर्तन के इस संधिकाल से प्रभावित होकर रोगग्रस्त हो जाते हैं। स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार से बच्चों की पाचन तंत्र की क्रिया सम्यक होकर उनकी धातुएं पुष्ट होती है । साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में अतिशय वृद्धि होती है। जिससे वो ऋतुओं के इस परिवर्तन के संधिकाल में होने वाले दुष्प्रभावो से सुरक्षित रहते हैं।
स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार शिविर में नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा के अलावा नेत्रनन्दन साहू, कमल धारिया, अश्वनी बुनकर, सिद्धराम शाहनी, राकेश इस्पात, देवबली कुंभकार एवं पंचकर्म टैकनीशियन रूबी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
































