छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: व्हाट्सऐप चैट से खुला 250 करोड़ का कथित लेन-देन

24

The Duniyadari : रायपुर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के खिलाफ 3200 पन्नों का आठवां पूरक अभियोजन पत्र विशेष अदालत में दाखिल किया। इस नए दस्तावेज़ के सामने आने के बाद चैतन्य बघेल की कानूनी चुनौतियां और गंभीर होती दिख रही हैं।

200–250 करोड़ की कथित रकम का दावा

ईडी के अनुसार, पूरक चालान में यह आरोप लगाया गया है कि शराब घोटाले से जुड़े लेन-देन के तहत चैतन्य बघेल को लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये मिले। जांच एजेंसी ने इन कथित लेन-देन के समर्थन में सौम्या, अरुणपति, अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के बीच हुई व्हाट्सऐप बातचीत का हवाला दिया है।

1000 करोड़ से अधिक की अवैध राशि के प्रबंधन का आरोप

एजेंसी का कहना है कि चैतन्य बघेल पर शराब घोटाले से अर्जित 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध आय (POC) के प्रबंधन का भी आरोप है। आरोपों के मुताबिक, वह इस धनराशि को तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष तक पहुंचाने के लिए अनवर ढेबर समेत अन्य लोगों के साथ समन्वय में काम कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस रकम का एक हिस्सा बघेल परिवार से जुड़े करीबी सहयोगियों के माध्यम से निवेश में लगाया गया, जिसकी अंतिम उपयोगिता की पड़ताल अभी जारी है।

जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी

ईडी ने 18 जुलाई को, चैतन्य बघेल के जन्मदिन के दिन, उन्हें भिलाई स्थित उनके निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच का हिस्सा है, जिसमें IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि घोटाले से राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई लाभार्थियों तक पहुंची।

शराब घोटाले की पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले की जांच में ईडी ने 3200 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताओं का उल्लेख किया है। इस मामले में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों समेत कई लोगों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक संगठित सिंडिकेट के जरिए इस कथित घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे।