टी शर्ट और खाकी निक्कर ,लिस्ट में किसे मिलेगा गिफ्ट….रिश्तेदारों का लगा मेला, नदियां के पार होगा ….श्रमवीरों का नया अवतार..

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लिस्ट में किसे मिलेगा गिफ्ट और कौन होगा लाइन शिफ्ट…

जिले के भीतर होने वाले ट्रांसफर की लिस्ट कुछ दिन हैं। लेकिन, कप्तान के लिस्ट में किसे गिफ्ट मिल रहा है और किसे लाइन शिफ्ट इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। जिले में लंबे समय के बाद थानेदारों की लिस्ट जारी हो रही हैं। लिस्ट जारी होने की सुगबुगाहट से थानेदारी का सपना संजोने वाले थानेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

खबरीलाल की माने तो थाना पोस्टिंग की मलाई खा चुके टीआई आकाओं के चक्कर लगा रहे हैं तो कुछ साहब से पुराना संबंध बता रहे हैं। मतलब मनचाहा थाना के लिए जुगाड़ जंतर के लिए मंतर मार रहे हैं।

वैसे देखा जाए तो जिले में जितने थाने हैं उसके अनुपात में थानेदारों की संख्या अधिक हैं तो ऐसे में कुछ का पत्ता कटना तय माना जा रहा हैं। पोस्टिंग कराने वाले पंडितों की माने तो इस बार जिले में नया प्रयोग होने जा रहा हैं। जिसमें कुछ थ्री स्टार वाले खाकी के खिलाड़ियों को थाने से हटाकर चौकी में खेलाया जाएगा।

ठीक भी हैं पूर्व कार्यकाल की बात करें तो एक टीआई चौकी में रहकर भी थानेदारों से ज्यादा मॉल इकट्ठा कर लिया। तभी तो लाइन अटैच के बाद भी ठाठ बाठ में कोई कमी नहीं रही। वे अब लाइन से सर बाहर निकालने छटपटा रहे हैं और कभी ट्रैफिक वाले तो कभी और कहीं खड़े होकर दुखड़ा सुना रहे हैं।

खैर जो भी हो पर कप्तान की रणनीति साफ हैं सख्त पुलिसिंग और जनता से बेहतर तालमेल रखने वाले खाकी के जाबांजों को गिफ्ट मिलेगा और पब्लिक को प्रताड़ित कर मॉल कमाने वालों को लाइन शिफ्ट किए जानेंं का मूड साहब बना चुके हैं।

रिश्तेदारों का लगा मेला, ठेका का काम में बड़ा खेला…

 

यूं तो नियमों की दुहाई देते हुए सरकारी अधिकारी कहते फिरते हैं कि विभाग में रिश्तेदारों को काम नहीं देने का नियम है, पर करते उल्टा हैं। मतलब दिखाने के दांत अलग और खाने के अलग!

खबरीलाल की माने तो सिंचाई विभाग के माइनर विभाग में लंबे समय से पदस्थ एक अधिकारी ने अपने रिश्तेदारों का मेला लगाया और उन्हें ठेका का काम देकर बड़ा खेला कर दिया। कहा तो यह भी जा रहा हैं साहब ने अपने बेटी और दामाद को कई काम कागज में देकर खेला किया हैं।

साहब ने रिश्तेदारों को काम न देने के नियम में ऐसा तोड़ निकाला की जानकार भी माथा पकड़ कर बैठ गए हैं। खैर ये तो मेन्टेन्स और अन्य खरीदी की बात है। साहब ने इससे आगे बढ़कर अपने दामाद के फर्म को पीस वर्क देकर उन्हें भी उपकृत खूब किया।

इर्रीगेशन के पूर्व साहब के समय हुए कागजी गाथा की कहानी एक आरटीआई से निकलकर सामने आई है। वैसे तो साहब ईमानदारी का रूआब दिखाते थे पर असल में बड़ा खेला कर गए!

 

नदियां के पार होगा किसका बेड़ापार…

 

राजश्री प्रोडकसंस कृत “नदियां के पार” सुपरहिट रही थी। जिले में भी नदियां के पार में राजस्व प्रोडक्‍शन गजबे हिट है। सीट सीमित है, टिकट की विकट समस्या के बीच किसका विकेट गिरेगा, यह भविष्य के गर्भ में है। दरअसल बात नदियां के पार की हैं। राजनीतिक गलियारों की चर्चा ने अधिकारियों को एडिशनल टेंशन में डाल दिया हैं।

खैर ये टेंशन कोई घंटा दो घंटा का नहीं है जैसे चर्चा है वो सच साबित हुआ तो जिले के अधिकारियों के लिए टेंशन हमेशा के लिए रहने वाला हैं। दरअसल कटघोरा में इसी महीने की लास्ट तारीख तक एडिशनल कलेक्टर और एडिशनल एसपी की पोस्टिंग होने की संभावना हैं।

यानि जिले के कमाऊ पूत कहे जाने वाले क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नदी उस पार चला जायेगा। राजस्व देने वाला एरिया कोरबा से अलग होगा। तो ऊर्जा नगरी के अधिकारियों को टेंशन तो बढ़ेगा ही!

खबरीलाल की माने तो कटघोरा में एडिशन एसपी की पोस्टिंग की खबर के बाद कई अधिकारी पोस्टिंग कराने के लिए जुगाड़ भिड़ा रहे हैं। सही भी है एसईसीएल से निकलने वाले कोयला और डीजल का हिस्सा किसी को मिले तो क्या कहना…

वैसे अपर कलेक्टर भी कटघोरा के लिए पॉवरफुल पोस्ट रहने वाला हैं। क्योंकि, कोयले की खान औऱ क्षेत्रफल की दृष्टि से कोरबा से बड़ा एरिया कटघोरा में शामिल होगा। इससे मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों का पहले के मुताबिक रुतबा में थोड़ा सा कमी तो होना ही हैं। जब पद के हिसाब से काम न हो तो टेंशन तो रहेगा ही…!

टी शर्ट और खाकी निक्कर…

 

राहुल गांधी की अगुवाई में निकली कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बीजेपी नेताओं के बोल बिगड़ने लगे हैंं। पहले पहल तो बीजेपी ने भारत टूटा नहीं तो कैसी भारत जोड़ो यात्रा—का सवाल उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की और इस पर भी बात नहीं बनी तो राहुल के टी शर्ट पर ही सवाल उठा दिए यानि राजनीति के बयान व्‍यक्तिगत होने लगे।

राजस्‍थान के जोधपुर में अमित शाह ने यहां तक कह दिया कि राहुल बाबा विदेशी टी-शर्ट पहनकर भारत जोड़ो यात्रा करने निकले हैं। जिसके बाद प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल ने इसका जवाब उसी अंंदाज में दिया जिसके लिए वो जानें जाते हैं।

बघेल ने तो सीधे सीधे बीजेपी और आरएसएस को निशाने पर ले लिया , बकौल बघेल ‘कांग्रेस देश को एकजुट करने में लगी हुई है, जबकि सत्तारूढ़ दल अभी भी टी-शर्ट और खाकी शॉर्ट्स में फंसा हुआ है डर अच्छा लगा..’।

यानि अभी तो कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा शुरु ही हुई है और बात टी शर्ट और खाकी निक्कर तक पहुंच गई आगे अभी बीजेपी और कांग्रेस के बीच कई बार आमना-सामना होना है ऐसे में अगर बात टी शर्ट और खाकी निक्कर तक सीमित रहे तो ठीक है नहीं तो……

श्रमवीरों का नया अवतार.. लूटा गए प्यार

 

देश की शान कहे जाने वाले कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने ओखली में सिर देना मुहावरे को सही साबित करते हुए श्रमवीरों को सर दे दिया ! फिर क्या श्रमिकों ने भी मौका का फायदा उठाया और हाथ साफ कर दिया। घटना के बाद हो हल्ला मचा तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटे… की तर्ज कंपनी के तरफ से प्रेस नोट जारी कर पुलिस के कार्यो पर सवाल उठा दिया गया।

ख़ैर सबको अपनी बात रखने का हक हैं,पर कंपनी और श्रमिकों के मामले में ऐसा नहीं है। प्रबंधन के अधिकारी 3 माह पहले श्रमवीरों का ट्रांसफर कर देते हैं और उन्हें बताना भी उचित नहीं समझते ! ऐसे में श्रमिक भी ड्यूटी करते रहे और जब वेतन नहीं मिला तो प्रबंधन से सैलरी के बारे में पूछ कर गुस्ताखी कर दिए। फिर क्या टेंशन वाले साहब का पारा चढ़ा और श्रमिकों का भी… फिर हुआ वही जिसका अंदाजा था।

श्रमिकों का आंदोलन प्रबंधन को रास न आया ! आंदोलनकारियों को हटाने जब गाली-गलौज का सहारा लिया तो सब बंटाधार हो गया। श्रमवीर नए अवतार में आ गए और कंपनी के अधिकारी पर लूटा गए प्यार…हालांकि श्रमवीरों का प्यार प्रबंधन को रास न आया।

हर बार की तरह पुलिस पर दबाव बनाकर श्रमिकों पर कार्यवाही तो करा दिए, पर किरकिरी प्रबंधन की ही हो रही हैं। खैर जिस अंदाज में कंपनी के बिगड़ैल अधिकारी के हौसले बढ़े थे उससे तो तय था ये सब तो उनके साथ होना ही था। कहा तो यह भी जा रहा कि आने वाले दिनों में कंपनी का विस्तार भी होना है तो कुछ और मजेदार होना ही हैं।

        ✍️  अनिल द्विवेदी, ईश्वर चन्द्रा