The Duniyadari : डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ इलाके में अवैध शराब का कारोबार एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुसराखुर्द में सामने आए ताजा मामले ने यह साबित कर दिया है कि नकली शराब और फर्जी आबकारी स्टीकर का धंधा यहां अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है। पहले भी इस क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें नकली स्टीकर और अवैध शराब जब्त की गई थी।
पुलिस जांच के अनुसार, शराब को दूसरे राज्यों से मंगाकर उस पर नकली आबकारी स्टीकर चिपकाए जाते थे, ताकि वह सरकारी शराब जैसी नजर आए। इसी चाल के कारण आम उपभोक्ता धोखे में आ जाता है। मुसराखुर्द में 1860 फर्जी स्टीकर का मिलना इस बात का संकेत है कि मामला छोटे स्तर का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इस कड़ी में पुलिस ने स्टिकर और फर्जी लेबल की सप्लाई करने वाले आरोपी अवधेश सिंह को बालाघाट (मध्यप्रदेश) से गिरफ्तार किया है।
राजनांदगांव जिले में एसपी अंकिता शर्मा के पदभार संभालने के बाद डोंगरगढ़ क्षेत्र में खुलेआम बिकने वाली अवैध शराब पर काफी हद तक रोक लगी है। पहले जो शराब सड़कों और मोहल्लों में बेधड़क बिकती थी, वह अब नजर नहीं आती। हालांकि, कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब यह ज्यादा छिपे हुए और सुनियोजित तरीके से घरों और अस्थायी ठिकानों से चलाया जा रहा है। मुसराखुर्द का मामला इसी बदले हुए तौर-तरीके का उदाहरण माना जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से शराब और नकली स्टीकर मंगाकर स्थानीय बाजार में खपाने की तैयारी थी। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने समय रहते इस नेटवर्क को पकड़ लिया और एक-एक कड़ी जोड़ते हुए मुख्य आरोपी तक पहुंच बनाई। नकली पैकिंग वाली शराब केवल अवैध व्यापार नहीं, बल्कि आम लोगों की सेहत और जान के लिए बड़ा खतरा है। इस तरह की शराब से गंभीर बीमारियों और मौत के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने साफ कर दिया है कि डोंगरगढ़ क्षेत्र में निगरानी और सख्ती को और मजबूत करने की जरूरत है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब माफिया में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन इस गुपचुप चल रहे कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार और कठोर कदम उठाना जरूरी होगा।














