The Duniyadari: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में किसान हित को प्राथमिकता देते हुए सक्ती जिला प्रशासन और संबंधित सहकारी समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बचा हुआ धान निर्धारित समयसीमा में खरीदा जाए। कोर्ट ने दो टूक कहा कि तकनीकी कारणों या नियमों की आड़ में किसान को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
मामला सक्ती जिले के ग्राम हसौद के किसान लक्ष्मण कुमार चंद्रा से जुड़ा है। उन्होंने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए अपनी 3.78 हेक्टेयर जमीन का पंजीयन कराया था और उन्हें 196 क्विंटल धान बेचने का टोकन जारी हुआ था। किसान ने तय प्रक्रिया के तहत 111.20 क्विंटल धान बेच भी दिया, लेकिन शेष 84 क्विंटल धान लेने से समिति ने इनकार कर दिया।
समिति का तर्क था कि भंडारण सत्यापन के दौरान धान किसान के सीधे कब्जे में नहीं मिला। इस पर किसान ने हाईकोर्ट की शरण ली और बताया कि बचा हुआ धान बटाईदार के पास सुरक्षित रखा गया था, जो खेती की सामान्य व्यवस्था का हिस्सा है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने पाया कि किसान का पंजीयन और टोकन पूरी तरह वैध हैं और धान के उत्पादन या भंडारण में किसी तरह की अनियमितता नहीं है। कोर्ट ने माना कि केवल तकनीकी आधार पर खरीद से इनकार करना उचित नहीं है।
अदालत ने कलेक्टर सक्ती, संबंधित सहकारी समिति और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान के बचे हुए 84 क्विंटल धान की खरीद 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।















