The Duniyadari: रायपुर- राजधानी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित कुछ राशन दुकानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सामने आए मामलों में यह आरोप लगाया जा रहा है कि पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में चावल देने के बजाय नकद राशि थमाई जा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है और सीधे तौर पर गरीब वर्ग के अधिकारों का हनन माना जा रहा है।
शिकायतों के मुताबिक, शहर के कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड और लालपुर क्षेत्र में स्थित दो दुकानों में इस तरह की अनियमितताएं लगातार देखने को मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि दोनों दुकानों का संचालन एक ही व्यक्ति के नाम से किया जा रहा है और कार्यप्रणाली भी लगभग समान है।
कार्डधारकों का कहना है कि दुकान पहुंचने पर उन्हें साफ शब्दों में कह दिया जाता है कि चावल उपलब्ध नहीं है, यदि पैसा लेना हो तो ले लें, अन्यथा कहीं और से व्यवस्था करें। इस रवैये से न केवल हितग्राहियों को परेशानी हो रही है, बल्कि शासन की योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ संचालकों के बीच आपसी समझ से चावल का एक अनौपचारिक दर तय कर लिया गया है।
बाजार में अधिक कीमत पर बिकने वाले चावल को हितग्राहियों से कम दर पर नकद देकर वापस लिया जा रहा है।
इतना ही नहीं, कई मामलों में तीन महीने के कोटे में से केवल दो महीने का ही अनाज दिया जा रहा है, जबकि तीसरे महीने का भुगतान नकद के रूप में किया जा रहा है।
इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि जरूरतमंदों को उनके हक से वंचित करने का गंभीर मामला भी बनती हैं।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और दोषियों पर किस तरह की सख्ती बरती जाती है।















