पीडीए दिवस नई सामाजिक चेतना की शुरुआत: अखिलेश यादव पीड़ितों के सम्मान और बराबरी के संकल्प को पुनर्जीवित करने का आह्वान

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The Duniyadari: लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने ‘पीडीए दिवस’ को सामाजिक न्याय की दिशा में एक नई पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन प्रतीकात्मक रूप से उन महान व्यक्तित्वों को समर्पित है, जिन्होंने शोषित और वंचित वर्गों के सम्मान, अधिकार और बराबरी के लिए बिना किसी दबाव के संघर्ष किया और वर्चस्ववादी सोच का समर्थन नहीं किया।

अखिलेश यादव ने कहा कि इस पहल से पीडीए समाज के लोगों में उत्साह है। उनके मुताबिक, यह कदम उन महापुरुषों के अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिनमें Kanshi Ram जैसे नेता भी शामिल हैं। उन्होंने संकेत दिया कि समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो परिस्थितियों के कारण खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते, लेकिन भीतर से इस विचारधारा से सहमत हैं।

उन्होंने कहा कि हर लिखी हुई बात का अर्थ वही नहीं होता जो दिखाई देता है। कई बार परिस्थितियां लोगों को अपनी असली सोच व्यक्त करने से रोक देती हैं। उनके अनुसार, विभाजनकारी राजनीति करने वाली शक्तियां समाज में भ्रम और बंटवारा पैदा कर सत्ता बनाए रखने की कोशिश करती हैं।

सपा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि जिन वरिष्ठों और मार्गदर्शकों का वे सम्मान करते हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता और आत्मीयता बनाए रखना उनकी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा और तिरस्कार ने समाज के बड़े हिस्से को एक साझा पीड़ा में जोड़ा है, और यही साझा अनुभव उन्हें एक सूत्र में बांधता है। उनके शब्दों में, जो भी पीड़ित है, वही पीडीए की भावना से जुड़ा है।