The Duniyadari: रायपुर/जगदलपुर, 7 फरवरी 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर के लालबाग मैदान में बस्तर पंडुम-2026 के संभाग स्तरीय आयोजन का शुभारंभ करते हुए आदिवासी समाज की संस्कृति को छत्तीसगढ़ की आत्मा बताया। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर जोर देते हुए समाज और अभिभावकों से बेटियों को पढ़ाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय पहचान, गौरव और परंपराओं को सहेजने का महत्वपूर्ण मंच है, जिसमें इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने भागीदारी दर्ज कराई है।

राष्ट्रपति ने बस्तर में माओवादी हिंसा में कमी और विकास कार्यों की रफ्तार का जिक्र करते हुए कहा कि अब क्षेत्र में शांति का माहौल बन रहा है, बंद पड़े स्कूल फिर खुल रहे हैं और दूरस्थ इलाकों तक सड़क, बिजली और अन्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर पंडुम को जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव बताते हुए कहा कि यह आयोजन पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, पहनावे और ढोकरा शिल्प जैसी कलाओं को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को सम्मान और आजीविका मिलने से ही लोककला जीवित रह सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर अब डर की पहचान से निकलकर विकास और विश्वास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान जैसी योजनाओं से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि, वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को बाजार और बस्तर के पर्यटन स्थलों को मिल रही अंतरराष्ट्रीय पहचान का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के जरिए अपनी नई पहचान बना रहे हैं।
कार्यक्रम में बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया और स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। समारोह में केंद्रीय व राज्य मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।
































