मनरेगा के स्थान पर नए कानून के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, केंद्र सरकार पर गरीब विरोधी नीति का आरोप

29

The Duniyadari : कोरबा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर रविवार, 21 दिसंबर 2025 को जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ने जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने बैठक आयोजित कर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। बैठक के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते हुए नए कानून को वापस लेने की मांग की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर कर उसकी जगह नया कानून लाने की कोशिश कर रही है, जिससे गरीबों के रोजगार का अधिकार छिनने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण परिवारों को काम मिलता रहा है, लेकिन नई व्यवस्था से यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है।

ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज चौहान ने आरोप लगाया कि “विकसित भारत जी राम जी” के नाम पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम से गांधी जी का नाम हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रोजगार के अधिकार को कानून का रूप देकर गरीब ग्रामीणों को आर्थिक संबल दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार को न तो महात्मा गांधी के विचारों से सरोकार है और न ही ग्रामीणों की आजीविका से।

पूर्व सभापति श्याम सुंदर सोनी ने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के स्वराज के विचारों को जमीन पर उतारने वाली योजना थी, जिसने कोरोना काल में भी ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस योजना को समाप्त करने पर आमादा है।

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र प्रताप जायसवाल ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना और उसकी मूल भावना से छेड़छाड़ करना यह दर्शाता है कि सरकार को गरीबों के अधिकारों और गांधीवादी विचारधारा से आपत्ति है। वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने इसे महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान बताते हुए कहा कि सरकार पहले ही बेरोजगारी से युवाओं का भविष्य प्रभावित कर चुकी है और अब ग्रामीण गरीबों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा किया जा रहा है।

बैठक की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद वक्ताओं ने एक स्वर में नए कानून को जनविरोधी बताते हुए कहा कि यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया, तो गांव-गांव से लेकर संसद तक आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने दावा किया कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर होना पड़ा था, उसी तरह इस कानून को भी वापस कराया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान जिला व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, मोर्चा-प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि, पार्षद, पूर्व जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।