रायगढ़ में कोल ब्लॉक मुद्दे पर बड़ा मोड़, सरकार को भेजा गया जनसुनवाई निरस्तीकरण का पत्र

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The Duniyadari : रायगढ़। जिंदल कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर जिले में चल रहे विवाद के बीच प्रशासन ने अहम पहल की है। जिला प्रशासन ने संबंधित जनसुनवाई को निरस्त करने के संबंध में राज्य सरकार को पत्र भेज दिया है। इसी मुद्दे पर आज तमनार में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच द्विपक्षीय चर्चा हुई, जिसमें इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। अब आंदोलन को समाप्त करने या जारी रखने का अंतिम निर्णय ग्रामीणों द्वारा लिया जाना है।

इस बीच हालात उस समय बिगड़ गए जब कल रायगढ़ जिले के ग्राम लिबरा स्थित सीएचपी चौक पर प्रदर्शन हिंसक हो गया। उग्र भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया, जिसमें एसडीओपी, थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस को हालात संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस के अनुसार, 8 दिसंबर 2025 को भौराभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध में सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए हैं। 27 दिसंबर की सुबह धरना स्थल पर करीब 300 लोग मौजूद थे, जिनमें से कुछ ने सड़क पर बैठकर यातायात बाधित करने की कोशिश की। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने समझाइश देकर उन्हें दोबारा टेंट स्थल पर भेजा।

हालांकि दिन चढ़ने के साथ आसपास के गांवों से लोग जुटते गए और भीड़ की संख्या लगभग एक हजार तक पहुंच गई। प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर के जरिए शांति बनाए रखने की अपील करता रहा, लेकिन दोपहर के समय स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई।

करीब ढाई बजे भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थर व डंडों से पुलिस पर हमला कर दिया। इस हिंसा में एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा, तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम और एक आरक्षक को गंभीर चोटें आईं, जबकि कई अन्य पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक भी घायल हुए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

उपद्रवियों ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया तथा अन्य शासकीय वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ी, जहां घुसकर कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई और कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई।

स्थिति शांत कराने के लिए विधायक विद्यावती सिदार, कलेक्टर रायगढ़ और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद भीड़ ने पथराव जारी रखा और दोबारा प्लांट क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं हुईं।

फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। जनसुनवाई रद्द करने के प्रस्ताव के बाद अब सबकी निगाहें ग्रामीणों के अगले फैसले पर टिकी हैं, जिससे आंदोलन की दिशा तय होगी।