The Duniyadari: सरगुजा- भ्रष्टाचार के एक मामले में सरगुजा की विशेष अदालत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लिपिक को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ममता पटेल की अदालत ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।
प्रकरण वर्ष 2020 में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा की गई ट्रैप कार्रवाई से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, बतौली ब्लॉक के मिडिल स्कूल घोघरा के सेवानिवृत्त हेडमास्टर बरनावास मिंज को सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण और सातवें वेतनमान के एरियर सहित करीब सात लाख रुपये प्राप्त होने थे। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बीईओ कार्यालय के लिपिक प्रमोद गुप्ता से संपर्क किया।
आरोप है कि आरोपी लिपिक ने पहले बिल तैयार करने के नाम पर पांच हजार रुपये की रिश्वत ली। इसके बाद उसने कोषालय में बिल जमा कराने के लिए अतिरिक्त दस हजार रुपये की मांग की और राशि जारी करने के लिए दबाव बनाया। लगातार परेशान किए जाने पर सेवानिवृत्त शिक्षक ने एसीबी से शिकायत की।
शिकायत के बाद एसीबी ने योजना बनाकर 30 दिसंबर 2020 को बतौली स्थित बीईओ कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की।
इस दौरान आरोपी प्रमोद गुप्ता को दस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया और तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।
इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि मामला एक सेवानिवृत्त शिक्षक से जुड़ा था, जिन्हें अपने ही हक की राशि पाने के लिए रिश्वत देने को मजबूर होना पड़ा।















