The Duniyadari : रायपुर। राजधानी रायपुर में एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर वर्दीधारियों के लिए नियम अलग हैं। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में पदस्थ एक पुलिसकर्मी द्वारा खुलेआम यातायात नियमों की अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है, जिसने पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित पुलिसकर्मी शहर में बिना हेलमेट बाइक चलाते हुए देखा गया। इतना ही नहीं, दोपहिया वाहन पर न तो वैध बीमा पाया गया और न ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र मौजूद था। वाहन में अवैध रूप से ढोलकी साइलेंसर लगा होना भी सामने आया है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त वाहन पर पहले से ऑनलाइन चालान दर्ज होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया।
यह वही पुलिस व्यवस्था है जो आम नागरिकों को हेलमेट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण-पत्र न होने पर रोकती है, चालान काटती है और सख्ती से नियमों का पालन कराती है। लेकिन जब नियम तोड़ने वाला खुद वर्दी में हो, तो मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के कृत्य मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय हैं। बिना हेलमेट वाहन चलाना, बीमा और पीयूसी के अभाव में वाहन संचालन तथा अवैध साइलेंसर का उपयोग कानूनन अपराध है। इसके साथ ही, एक पुलिसकर्मी द्वारा नियमों का उल्लंघन सेवा आचरण नियमों के भी खिलाफ माना जाता है, जिस पर विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
इस घटना ने “कानून के समक्ष समानता” के सिद्धांत को लेकर भी बहस छेड़ दी है। यदि कानून लागू करने वाले ही नियमों को नजरअंदाज करें, तो आम जनता से कानून पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। ऐसे मामलों से पुलिस की सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुंचता है और लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
अब निगाहें सक्षम अधिकारियों और पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी या फिर मामला औपचारिकताओं में दबकर रह जाएगा। जनता यह जानना चाहती है कि क्या कानून वास्तव में सबके लिए एक-सा है, या वर्दी पहनते ही नियम बदल जाते हैं।














