Saturday, March 14, 2026
Home Breaking विष्णु का सुशासन : मजदूरी की, मशरूम उगाया, अब चला रही सीएचसी

विष्णु का सुशासन : मजदूरी की, मशरूम उगाया, अब चला रही सीएचसी

74

The Duniyadari: धमतरी– कभी बड़ी आर्थिक परेशानी को झेलने वाली धमतरी विकासखण्ड के सारंगपुरी पंचायत की मधु कंवर आज पूरे क्षेत्र में लखपति दीदी के नाम से जानी जा रहीं हैं। मधु कंवर ने कभी खेतों में मजदूरी भी की है, मशरूम भी उगाया है, लेकिन आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके सपनों ने सही आकार ले लिया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में अब मधु कॉमन सर्विस सेंटर-सीएचसी चला रहीं हैं। इस सर्विस सेंटर से सारंगपुरी ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी हो गई है।

सीएचसी के माध्यम से लोगों को रियायती दरों पर ई-गवर्नेंर्स की सुविधाएं मुहैय्या कराकर श्रीमती कंवर प्रतिमाह 10-12 हजार रूपये कमा रहीं हैं। मधु ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया है, बल्कि अपने गांव और समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

श्रीमती कंवर बताती हैं कि पहले परिवार की माली हालत बहुत खराब थी। वे बड़े किसानों के खेतों में रोजी-मजूरी किया करतीं थीं। बच्चों की पढ़ाई और घर की दूसरी जरूरतें पूरा करना भी मुश्किल था। सिमित आय और संसाधनों के बीच सही ढंग से जीवन जीने के लिए संघर्ष करने वाली मधु ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर जय मॉं कर्मा महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से प्रशिक्षण और स्वरोजगार के तरीके सीखे। उनके समूह ने सबसे पहले धान खरीदी-बिक्री का काम शुरू किया। कुछ आमदनी होने पर मशरूम उत्पादन किया और उसे बेचकर मुनाफा कमाते गए। आजीविका मिशन के तहत समूह के माध्यम से लोन लेकर उन्होंने अपने घर में ही कॉमन सर्विस सेंटर शुरू किया। इस सर्विस सेंटर में सरकार की ई-गवर्नेंस सुविधाएं जैसे-आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनाना, विवाह पंजीयन करना, बिजली बिल का भुगतान, आधार कार्ड-श्रम कार्ड-आयुष्मान कार्ड बनाने जैसे दूसरे कई काम शुरू किये। इन सेवाओं के लिए शासन द्वारा निर्धारित शुल्क से मधु हर महीने 10-12 हजार रूपये कमा रहीं हैं।

मधु कंवर और उनके स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर मोमबत्ती बनाना, केक बनाना, मछली पालन, मशरूम उत्पादन, बैंक सखी जैसे कई कामों को अपने हाथों में लिया है। आज मधु ने अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर घर-गृहस्थी की बागडोर को भी मजबूती दी है। स्व सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा दे रही मधु का सामाजिक और पारिवारिक दायित्व पर भी आत्मविश्वास बढ़ा है।