शाम ढले सक्रिय होते फड़, पुलिस की सख्ती पर उठ रहे तीरछे सवाल

28

The Duniyadari : जांजगीर-चांपा। रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय डीजीपी–आईजीपी कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की पुलिस को जनता के बीच अपनी छवि मज़बूत करने, भरोसा बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की सलाह दी थी। लेकिन जांजगीर-चांपा जिले की वास्तविक स्थिति इस दिशा में अभी भी सुधार की बड़ी आवश्यकता दिखा रही है।

खेतों में शाम ढलते ही शुरू हो जाता है लाखों का जुआ कारोबार

पिसौद, पीथमपुर, मुलमुला और उदयबन के खेतों में जैसे ही शाम ढलती है, ताश के दांव लगाने वालों की भीड़ जमा होने लगती है। वायरल वीडियो में खुलेआम लगी भीड़, मोटरसाइकिलों की कतार और ताश की गोटियां साफ नजर आती हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस की गश्त जरूर होती है, लेकिन जुआरियों के ठिकाने लगातार बदलते रहते हैं, जिससे कार्रवाई टिकाऊ साबित नहीं हो पाती।

पिछले महीनों में कई छापे, फिर भी धंधा फिर लौट आया

  • अक्टूबर में रमन नगर क्षेत्र में पुलिस ने 8 आरोपियों को पकड़कर नकदी और ताश सामग्री जब्त की थी।
  • पामगढ़ और चांपा में भी खेतों और सड़क किनारे चल रहे जुए पर कई बार कार्रवाई हुई।
  • पीथमपुर में 10 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।

फिर भी, चुनाव बीतते ही कई स्थानों पर फड़ एक बार फिर सक्रिय हो गए।

पुलिस की गश्त बढ़ी, पर जुआरियों की रणनीति आगे

एसपी विजय पांडे ने ग्रामीण इलाकों में रात की गश्त बढ़ाई है और विशेष टीमों को निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस की हलचल की भनक लगते ही जुआरियों का पूरा नेटवर्क कुछ ही मिनटों में समेट जाता है, और अगले दिन किसी नई जगह पर फिर सक्रिय हो जाता है।

पीएम की सलाह बनाम जमीनी हकीकत

प्रधानमंत्री की ‘पुलिस-जनता विश्वास में सुधार’ वाली बात जहां पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को नए आयाम देने पर जोर देती है, वहीं जांजगीर-चांपा में खेतों में चल रहे खुलेआम जुए की समस्या बताती है कि स्थानीय स्तर पर अब भी कई कदम उठाए जाने बाकी हैं।

कमजोर निगरानी, अस्थायी कार्रवाई और ग्रामीणों की बढ़ती शिकायतें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि जिले को कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए और अधिक कठोर, तेज़ और निरंतर अभियान चलाने होंगे।