शिक्षा विभाग में भूचाल: लोक आयुक्त ने सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को भेजा समन, शिकायत पर तीखी नाराज़गी

12

The Duniyadari : रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर हलचल मच गई है। लोक आयुक्त ने विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को पेश होने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई, जिसमें विभागीय अधिकारियों पर निजी स्कूल संचालकों से सांठगांठ और रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

जांच रिपोर्ट आठ महीने से लंबित, लोक आयुक्त सख्त

कांग्रेस नेता विकास तिवारी की ओर से मार्च 2025 में दायर शिकायत में आरोप था कि विभाग के अधिकारी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को संरक्षण देकर नियमों का दुरुपयोग कर रहे हैं। लोक आयुक्त ने शिकायत को गंभीर मानते हुए सचिव को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट न आने पर आयुक्त ने कड़ी नाराज़गी जताई और इसे न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में माना।

️ “अधिकारियों की मनमानी चरम पर”—विकास तिवारी

विकास तिवारी ने आरोप लगाया कि सचिव सिद्धार्थ परदेसी के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था की हालत बेहद खराब हो चुकी है। उनका कहना है कि

  • निजी स्कूल माफिया को संरक्षण दिया जा रहा है,
  • गरीब बच्चों के निःशुल्क शिक्षा अधिकार को नजरअंदाज किया जा रहा है,
  • और राज्य का शिक्षा स्तर 36 में से 35वें स्थान तक गिर गया है।

तिवारी का आरोप है कि विभाग हाईकोर्ट से लेकर लोक आयुक्त तक की अनदेखी कर रहा है।

KPS पर फर्जी स्कूल चलाने के गंभीर आरोप

तिवारी ने भिलाई के KPS समूह पर रायपुर में कई फर्जी सीबीएसई स्कूल संचालित करने का आरोप भी लगाया। उनका दावा है कि—

  • ये स्कूल मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ स्कूल संहिता 1975,
  • RTE एक्ट 2009,
  • और छत्तीसगढ़ निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा नियम 2010

का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। लगभग 10,000 बच्चों की शिक्षा इन अवैध संचालन के कारण प्रभावित होने की बात भी कही गई। तिवारी ने आरोप लगाया कि इन स्कूलों में 25% आरक्षित सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा और अभिभावकों से भारी-भरकम अवैध फीस वसूली जा रही है।

⚖️ हाईकोर्ट भी पहले जता चुका है नाराज़गी

शिक्षा विभाग पर पहले भी अदालत ने सख्त टिप्पणी की थी। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “राज्य में तो पान ठेले वाला भी नर्सरी स्कूल खोल सकता है, लेकिन बड़े स्कूल संचालकों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती।”

समन जारी होते ही विभाग में हड़कंप

लोक आयुक्त के ताजा आदेश के बाद शिक्षा विभाग में खासी बेचैनी फैल गई है। माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में यह मामला और भी गंभीर मोड़ ले सकता है। विकास तिवारी ने मांग की है कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों और संलिप्त स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो सके।