11 सूत्रीय मांगों को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स का आंदोलन तेज, सरकार की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी

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The Duniyadari : वर्षों से लंबित मांगों पर निर्णय न होने से आक्रोश, दिसंबर अंत में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

रायपुर। छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा अपनी 11 प्रमुख मांगों को लेकर शुरू किया गया चरणबद्ध आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत ने कहा कि नर्सिंग कर्मियों की समस्याएं बीते करीब एक दशक से लंबित हैं। 4 जुलाई 2024 को विभागीय मंत्री द्वारा छह महीने के भीतर कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर निर्णय लेने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब एक साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं होने से नर्सिंग स्टाफ में भारी असंतोष है।

डॉ. राजपूत के अनुसार इसी उपेक्षा के चलते संघ ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। आंदोलन के तहत अस्पताल परिसरों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। पहले चरण में 11 दिसंबर को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। दूसरे चरण में 12 से 14 दिसंबर तक नर्सिंग कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर सेवाएं दीं। तीसरे चरण में 15, 16 और 17 दिसंबर को प्रतिदिन सुबह 11 से 12 बजे तक एक घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन किया जा रहा है। यदि इसके बाद भी मांगों पर कोई पहल नहीं हुई तो 29, 30 और 31 दिसंबर को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में नर्सिंग संवर्ग के विभिन्न पदों के ग्रेड पे में संशोधन कर बढ़ोतरी करना या शासन द्वारा गठित 20 सदस्यीय समिति की सिफारिशों को आंशिक संशोधन के साथ लागू करना शामिल है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में खाली पड़े नियमित पदों पर संविदा व कलेक्टर दर पर कार्यरत नर्सों को समायोजित करने, समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने और कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की गई है।

अन्य मांगों में नर्सिंग स्टाफ को अध्ययन अवकाश की अनुमति, लंबित समयमान वेतनमान का लाभ ब्याज सहित देने, पदनाम में बदलाव कर स्टाफ नर्स को नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग सिस्टर को सीनियर नर्सिंग ऑफिसर घोषित करने, पदोन्नति के अवसर देने, नर्सिंग एवं वाशिंग अलाउंस लागू करने जैसे विषय शामिल हैं।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने नर्सिंग कर्मियों के बच्चों के लिए झूला घर, स्वयं व परिवार के इलाज हेतु कैशलेस सुविधा और मेडिकल कॉलेज परिसरों में मरीजों के परिजनों के लिए ठहरने व मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की भी मांग की है।

नर्सिंग ऑफिसर्स का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।