Thursday, July 9, 2026
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5 हजार से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं, हाईकोर्ट सख्त — सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

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The Duniyadari: बिलासपुर- छत्तीसगढ़ के हजारों सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं होने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने गंभीर नाराज़गी जताई है। अदालत ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को तय की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनवरी 2025 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी और उनकी खराब स्थिति को उजागर किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 5,000 से अधिक विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक स्कूलों में शौचालय जर्जर और अनुपयोगी हालत में हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में छात्राओं और शिक्षकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है और इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, विशेष रूप से मूत्र संक्रमण के मामले भी बढ़ रहे हैं।

अदालत ने बिलासपुर जिले की स्थिति पर भी चिंता जताई, जहां 160 से अधिक स्कूलों में शौचालयों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं, वहीं 200 से अधिक विद्यालयों में शौचालय पूरी तरह से अनुपयोगी बताए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं के लिए अलग और उपयोगी शौचालयों की कमी स्कूल छोड़ने की दर बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन सकती है। इसे अदालत ने व्यवस्था की गंभीर विफलता माना है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यू-डीआइएसई) 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 56,615 स्कूलों में से केवल 52,545 स्कूलों में ही छात्राओं के लिए कार्यरत शौचालय उपलब्ध हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में लगभग 19.54 लाख छात्राएं अध्ययनरत हैं।