The Duniyadari : संवेदनाओं, स्मृतियों और पारिवारिक मूल्यों से सराबोर एक आत्मीय वातावरण में डॉ ऋत्विज तिवारी की दूसरी पुस्तक ‘घर से मकान’ का विधिवत विमोचन संपन्न हुआ। यह आयोजन उनके पिताजी स्वर्गीय श्री सुरेन्द्र तिवारी जी के वार्षिक श्राद्ध के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसने इस कार्यक्रम को भावनात्मक रूप से और भी विशेष बना दिया।

पुस्तक का विमोचन डॉ ऋत्विज तिवारी के परिजनों और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के कर-कमलों से हुआ। इस अवसर पर बुआ श्रीमती जया तिवारी, श्रीमती स्वधा शर्मा, चाचाजी श्री नीलमणि तिवारी, श्री राघवेन्द्र तिवारी, श्री शैलेन्द्र तिवारी, श्री वीरेन्द्र तिवारी सहित परिवार के अनेक सदस्य एवं निकट संबंधी उपस्थित रहे। सभी की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

यह डॉ ऋत्विज तिवारी की दूसरी पुस्तक है। इससे पूर्व उनकी पहली कृति ‘तुम अपने हो’ को पाठकों से व्यापक सराहना मिली थी। नई पुस्तक ‘घर से मकान’ में लेखक ने संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ते समाज के बदलाव, रिश्तों में आए भावनात्मक अंतर और बदलते जीवन-मूल्यों को संवेदनशील एवं सहज भाषा में प्रस्तुत किया है।
कार्यक्रम के दौरान लेखक ने कहा कि यह पुस्तक उनके निजी अनुभवों, पारिवारिक संस्कारों और आत्ममंथन का परिणाम है। पिता की स्मृति में, परिवार के बीच पुस्तक का विमोचन होना उनके लिए अत्यंत भावुक और अर्थपूर्ण क्षण रहा।
पुस्तक ‘घर से मकान’ देश-विदेश के पाठकों के लिए Amazon, Flipkart, Google eBook और Google Play Store जैसे प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। साहित्य प्रेमियों और सामाजिक विषयों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक विचारोत्तेजक और संवेदनशील कृति के रूप में अपनी पहचान बना रही है।





























