तीसरी रेल लाइन की आहट से बढ़ी बेचैनी, इमलीछापर समेत कई बस्तियों पर मंडराया विस्थापन का साया

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The Duniyadari : कोरबा, 02 जनवरी। पवन टॉकीज रेलवे फाटक से लेकर हसदेव नदी पुल तक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना के तहत केवल नई पटरी ही नहीं, बल्कि बिजली आपूर्ति के लिए सब-स्टेशन, ट्रैक से जुड़ा तकनीकी ढांचा और सुरक्षा से जुड़े कई स्थायी इंतजाम किए जाने की योजना है।

रेल परियोजना की गतिविधियां तेज होते ही इंदिरानगर, फोकटपारा और कुसमुंडा क्षेत्र की इमलीछापर बस्ती में रहने वाले लोगों की चिंताएं भी गहराने लगी हैं। बीते करीब ढाई महीनों से रेलवे विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में निवासरत परिवारों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनमें निर्धारित समय के भीतर स्थान खाली करने की बात कही गई है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह संकेत साफ तौर पर बस्ती हटाने की तैयारी की ओर इशारा करता है। जनप्रतिनिधियों की ओर से भले ही भरोसे दिलाए जा रहे हों, लेकिन स्वीकृत रेल परियोजना और भूमि उपयोग की स्थिति को देखते हुए लोगों को कार्रवाई टलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

रेलवे के कोरबा रेलखंड अंतर्गत सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) कार्यालय की ओर से जारी नोटिस के बाद बस्तीवासियों में आक्रोश फैल गया। विरोध स्वरूप धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम किया गया। इमलीछापर चौक पर हुए चक्काजाम को प्रशासनिक हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद समाप्त तो कर दिया गया, लेकिन विस्थापन का डर अब भी लोगों के दिलों में बना हुआ है।

प्रभावितों का कहना है कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जमीन पर किस तरह का निर्माण प्रस्तावित है और हटाए जाने की स्थिति में उन्हें कहां बसाया जाएगा या मुआवजे की क्या व्यवस्था होगी। इसी अनिश्चितता के चलते बस्ती में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

रेलवे से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन के साथ सुरक्षा बोर्ड, ट्रैक मेंटेनेंस संकेत और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा कुसमुंडा के इमलीछापर इलाके में ओवरब्रिज के साथ एक नए रेलवे यार्ड के निर्माण की भी योजना पर काम चल रहा है।